एटा। मेडिकल कॉलेज में भर्ती अज्ञात युवक ने बुधवार की रात 8 वें दिन दम तोड़ दिया। युवक को उच्च उपचार दिलाने के लिए रेफर करने को स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई बार पुलिसकर्मी मुहैया कराने के लिए सूचना भेजी गई। लेकिन पुलिस की मानवता को शर्मसार करने वाली शैली सामने आई। पुलिसकर्मी नहीं मिलने की वजह से अज्ञात को उच्च उपचार नहीं मिल पाया और उसकी जान चली गई।
कोतवाली देहात क्षेत्र स्थित गांव नगला पवल के पास 18 अक्तूबर की दोपहर में 35 वर्षीय युवक घायल अवस्था में पड़ा मिला था। इसके बाद एंबुलेंस को फोन किया गया। ईएमटी जितेंद्र कुमार ने उसे बेहोशी की अवस्था में अज्ञात के रूप में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। युवक के शरीर पर चोट के निशान भी थे। चिकित्सकों के अनुसार युवक जहरखुरानी का शिकार हुआ और उसके बाद कोई सड़क किनारे फेंक कर चला गया। इसकी वजह से शरीर पर चोटें आईं। युवक को उच्च उपचार की जरूरत थी। मेडिकल कॉलेज से कोतवाली नगर पुलिस को सूचना भेजकर आगरा, अलीगढ़ व सैफई में उच्च उपचार की जरूरत होने पर भेजने के लिए पुलिसकर्मी या होमगार्ड मुहैया कराने की मांग की। लेकिन पुलिस की ओर से कोई कर्मी या गार्ड नहीं भेजा गया।
इसके बाद युवक की हालत गंभीर होती चली गई। तब 23 और 24 अक्तूबर को कोतवाली नगर को लगातार रिमांइडर भेजे गए। लेकिन पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया और कोई गार्ड नहीं भेजा गया। हालांकि 25 अक्तूबर की रात करीब 10 बजे युवक ने दम तोड़ दिया। इसको लेकर पुलिस की मानवता को शर्मसार करने वाली शैली की बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज में खूब चर्चा होती रहीं। युवक की मौत होने के बाद पुलिस आई और शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया गया है। कोतवाली प्रभारी सुधीर सिंह ने बताया कि मोबाइल पर इस तरह की सूचना नहीं मिली। मेमो का पता कराएंगे। सूचना मिलती तो किसी कर्मचारी को जरूर भेजा जाता।