आम बजट में भी इस बार भी मनरेगा से तालाबों की खुदाई, जीर्णोद्धार करने के प्रावधान किए गए हैं। पूर्व में इससे तालाबों की खुदाई कराई गई है। पर, अनदेखी के कारण जहां तालाब सूखे पड़े हैं। वहीं किनारे लगे पौधों का भी पता नहीं है।
जिले में 2012 में मनरेगा के माध्यम से तालाबों की खुदाई करके उन्हें विकसित किया गया था। सुंदरीकरण के नाम पर पौधरोपण किया गया था। सुरक्षा के लिए बेरीकेडिंग आदि कराई गई थी। तालाब तो बने। पर, ग्राम पंचायतों और प्रशासन ने रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया। इसके कारण ज्यादातर तालाबों में गर्मी तो क्या जनवरी-फरवरी माह में ही पानी नहीं है। सूखे तालाबों की भूमि पर लोगों ने कब्जे कर लिए हैं। तवालपुर के चंद्रभान ने कहा कि सरकार तालाब की खुदाई के लिए बजट दे रही है। अच्छी बात है, लेकिन तालाबों की उपयोगिता सुनिश्चित हो। इससे ग्रामीणों और पशुओं को भी उसका लाभ मिल सके। इटौआ के पुष्पेंद्र का कहना है कि पूर्व में गांव-गांव में तालाब खोदे गए। रजवाहों के पास स्थित कुछ तालाबों को तो पंप लगाकर भरा भी गया, लेकिन ज्यादातर तालाब सूखे ही रहे। ग्रामीणों का कहना है कि खुदाई, जीर्णोद्धार से ज्यादा जरूरी इनके रखरखाव और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कराना होना चाहिए।