एटा। सीबीएसई बोर्ड परीक्षा का परिणाम आने के बाद कई विद्यार्थी खुश है। उनके चेहरे खिले हुए हैं। तो कई अंक कम आने से कुछ विद्यार्थी परेशान भी हैं। उन्हें भविष्य की चिंता सताने लगी है। मनोचिकित्सकों का कहना है दबाव महसूस करने पर विद्यार्थी अवसाद में चला जाता है। ऐसे में समस्या खड़ी हो जाती है। ऐसे छात्र निराश न हों। मेहनत करेंगे, भविष्य में सफलता जरूर मिलेगी।
सोमवार को सीबीएसई बोर्ड परीक्षा का परिणाम जारी हुआ। जिसे देख कई छात्र मायूस हैं। कारण कि उनके अंक कम आए हैं। मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ. राहुल कुमार ने बताया कि सभी विद्यार्थियों का दिमाग एक जैसा नहीं होता है। अंक कम आने पर अभिभावकों को बच्चों को डांटना नहीं चाहिए। कम अंक आने के कारण पहले से ही उनका मन खिन्न होता है। ऊपर से डांट पड़ जाए तो और ज्यादा परेशान हो जाते हैं। ऐसे में वह अवसाद में जा सकते हैं। डांटने से कुछ बदलता नहीं है। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों का हौंसला बढ़ाएं और आगे से मेहनत करने की बात कह मुकाम हासिल करने को प्रेरित करें। सफलता और असफलता जीवन के दो पहलू हैं। अगर असफलता को हावी नहीं होने देंगे तो सफलता के बेहतर रास्ते बनेंगे। बच्चों के अभिभावकों को यह बात समझने की जरूरत है।
कम अंक वाले कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए हैं सफल
नवोदय विद्यालय के प्रधानाचार्य आरके शर्मा ने कहा कि जिन बच्चों के अंक मनमाफिक नहीं आए हैं। ऐसे बच्चे बिलकुल निराश न हों। कई उदाहरण हैं जिनके बोर्ड परीक्षा में अंक कम आए। लेकिन लेकिन यूपीएससी, यूपीपीसीएस, नीट, आईआईटी आदि परीक्षाओं में सफलता पाई। बच्चों से यही कहना है कहां कमी रह गई, इसका आकलन कर पूरे मन से आगे की तैयारी करें। इससे तनाव कम होगा और भविष्य के लिए पढ़ाई पर और गंभीर बनेंगे।