एटा। जिलाधिकारी ने 4 कलेक्ट्रेट कर्मियों पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की थी। इस आदेश के विरुद्ध तीन कर्मचारियों को उच्च न्यायालय से पहले स्थनादेश मिल गया था। अब एक अन्य लिपिक को भी स्टे हासिल हो गया है।
कलेक्ट्रेट में 1993 और 1995 में 30 सीजनल सहायक वासिक बाकी नवीसों को विनियमित कर लिपिक बनाया गया था। शिकायत के बाद गठित एसआईटी (विशेष जांच दल) की जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी पाई गई। शासन के निर्देश पर डीएम ने 23 नवंबर 2024 को कार्रवाई आदेश जारी किया। इसमें कलेक्ट्रेट के 19 कर्मचारियों को नियम विरुद्ध विनियमितीकरण का दोषी ठहराया गया। सेवारत 4 कर्मियों की बर्खास्तगी की गई तो सेवानिवृत्त कर्मियों की पेंशन रोकी गई। सभी से वेतन, पेंशन, फंड आदि की वसूली का आदेश दिया गया।
बर्खास्तगी की सूची में शामिल कर्मचारी महेश यादव, विनीत कुमार और नरेंद्र सिंह यादव ने आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की। उच्च न्यायालय ने डीएम के आदेश को स्थगित करते हुए सभी से उनके पदों पर कार्य का आदेश दिया। इस पर तीनों कर्मचारियों को ज्वॉइन करा दिया गया। जबकि चौथे बर्खास्त कर्मी हरिनंदन सिंह को मृतक आश्रित में नौकरी मिली थी। उन्होंने भी उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की। इस पर सोमवार को डीएम का आदेश स्थगित करते हुए हरिनंदन का उनके पद पर कार्य कराने और माहवार वेतन दिए जाने का आदेश दिया है। अपर जिलाधिकारी प्रशासन सत्य प्रकाश ने बताया कि आदेश मिलने पर उसका पालन कराया जाएगा।