एटा। यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल पर निजी व सरकारी अस्पतालों के साथ प्रयोगशालाओं से प्राप्त संक्रामक रोगियों की सूचना सीधे दर्ज की जाएगी। इससे लखनऊ में बैठे अधिकारी इस पर नजर रखेंगे। इसके साथ ही मरीजों को बेहतर उपचार की व्यवस्था होगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उमेश त्रिपाठी ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान यूपी कोविड-19 ट्रैक पोर्टल विकसित किया गया था। जिस पर प्रयोगशालाओं के साथ अस्पतालों से रिपोर्टिंग की जाती थी। इससे रोगियों का प्रबंधन व उनका उपचार आसान हो गया था। अब सरकार द्वारा संक्रामक रोगों की निगरानी के लिए यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल विकसित किया गया है। इस पर संक्रामक रोगियों की सूचना सीधे दर्ज की जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस पोर्टल पर मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया, हैजा, स्क्रब टाइफस, लेप्टोस्पायरोसिस, कालजार, हेपेटाइटिस बी एवं सी, टाइफाइड, फाइलेरिया, दिमागी बुखार समेत बारह प्रकार के संक्रामक रोगों के विषय में सूचना दर्ज की जाएगी। इससे सूचनाओं के आदान- प्रदान की प्रक्रिया भी पेपरलेस हो जाएगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने चिकित्सकों व इससे जुड़े स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने के निर्देश दिए हैं।
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मरीजों के इलाज में रहेगी आसानी
सीएमओ ने बताया कि भारत सरकार ने मरीजों का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से संरक्षित करने का निर्णय लिया है। इससे मरीजों का उपचार आसान होगा, साथ ही चिकित्सक के लिए भी पूर्व की जानकारी मिलना आसान हो जाएगी। इस कार्य की शुरुआत में चिकित्सक एवं पैथालॉजी संचालक को कठिनाई आ सकती है, लेकिन कुल मिलाकर स्वास्थ्य के नजरिए से यह फायदेमंद है।
यह होगा फायदा
इस पोर्टल के सक्रिय होने से चिकित्सा इकाइयों एवं प्रयोगशालाओं से इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड जेनरेट हो सकेगा। लोगों को क्यूआर कोड युक्त लैब रिपोर्ट घर बैठे प्राप्त हो सकेगी। साथ ही बीमारियों का रीयल टाइम डेटा देखा जा सकेगा। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।