मच्छरों का डंक शूल बनता जा रहा है। मलेरिया, वायरल फीवर के बाद अब डेंगू के भी केस सामने आने लगे हैं। पर, इससे निपटने के इंतजाम धूल फांक रहे हैं। पालिका प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और मलेरिया विभाग के जिम्मेदार खामोश बने हैं। पालिका के अफसर बजट का अभाव बताकर फागिंग कराने से पल्ला झाड़ रहे हैं, तो मलेरिया विभाग ब्लॉक क्षेत्रों में दवा भेजकर चुप बैठ गया है।
जिले में मलेरिया, बुखार का प्रकोप बना हुआ है। इसकी चपेट में प्रत्येक परिवार का कोई न कोई सदस्य है। इसके बाद भी मलेरिया और वायरल से निपटने के लिए पालिका ने अब तक प्रयास शुरू ही नहीं किए हैं। फागिंग मशीन शोपीस बनी हुई है। बता दें कि शहर की आबादी को डेंगू और मलेरिया से बचाने के लिए पालिका के पास केवल एक फॉगिंग मशीन है। पांच साल में शहर का दायरा बढ़ने, नए इलाके विकसित होने के साथ आबादी बढ़ी है। पर, पालिका प्रशासन के संसाधनों की हालत जस की तस है।
मलेरिया, वायरल और डेंगू का प्रकोप होने से स्कूलों में भी विद्यार्थियों की उपस्थिति कम हो गई है। बच्चों के बीमार होने के कारण वे स्कूल नहीं आ रहे हैं। वहीं तमाम अभिभावक छोटे बच्चों को बीमार होने के डर से स्कूल भेजने से बच रहे हैं।
मलेरिया के बढ़ते प्रकोप को लेकर डाक्टर भी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। वरिष्ठ चिकित्सक डा. राजेश सक्सेना कहते हैं कि डेंगू का मच्छर दिन में काटता है। ऐसे घर के आसपास जलभराव रोका जाए। वहीं साफ-सफाई का भी ध्यान दें। बुखार आने पर तत्काल फिजीशियन को दिखाकर दवा लेनी चाहिए।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ें
रोग सैंपल पुष्टि
मलेरिया 5598 76
डेंगू 120 2