परीक्षा देते बेसिक स्कूल के बच्चे
- फोटो : amar ujala
बच्चों को जैसी शिक्षा दी जाए, वैसे उनका भविष्य होता है। लेकिन जब शिक्षा देने वाले ही गलतियां करेंगे, तो कैसे अच्छी शिक्षा की उम्मीद की जा सकती है। इसकी बानगी शनिवार को परिषदीय विद्यालयों की परीक्षा के प्रश्न पत्र में देखने को मिलीं। जब बच्चों ने गलतियों की जानकारी दी, तो शिक्षकों ने बीएसए से गलतियों को लेकर शिकायत की।
जिले में शनिवार को परिषदीय विद्यालयों की वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। इस मौके पर जिले के परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से पांच तक हिंदी और कक्षा छह से आठ तक की हिंदी और पर्यावरण अध्ययन की परीक्षा हुई। इस मौके पर कक्षा दो से आठ तक के बच्चों की लिखित परीक्षा हुई। विद्यार्थियों को डायट द्वारा तैयार कराए गए प्रश्नपत्र भेजे गए। इन प्रश्नपत्रों में तमाम शाब्दिक गलतियां सामने आईं। कक्षा पांच की पुस्तक कलरव को कलख कर दिया गया था। परिभाषा को परिभाशा लिखा गया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रश्नपत्रों को जिले से बाहर छपवाया गया था और वहीं से सील बंदकर लिफाफे स्कूल को भेजे गए। इसलिए गलतियों को चेक नहीं किया जा सका। डायट प्राचार्य मनोज गिरि ने बताया कि प्रश्नपत्रों में गलतियों की शिकायत आई है। यह गलतियां छपाई के दौरान हुई हैं। इसके लिए प्रिटिंग प्रेस को निर्देश दिए गए हैं। भविष्य में इसका ध्यान रखा जाएगा।
ये रहीं गलतियां
- कलरव को कलख लिखा गया।
- घंटे को धंटे लिखा गया।
- वसुंधरा को वसुंध्रा।
- वर्तनी को वर्तती।
- भाववाचक संज्ञा को भाववाक संज्ञा।
- शुद्ध को भाुद्ध।
- प्रकाश को प्रका ा।
- पशु को पसु।
- शब्द को भाब्द।
-स्पष्ट को स्पश्ट।
-परिभाषा को परिभाशा।
मॉडल स्कूल में नहीं हुई मौखिक परीक्षाएं
जिले में आदर्श शिक्षा का उदाहरण प्रस्तुत करने वाले मॉडल स्कूल मेें कक्षा एक के विद्यार्थियों ने मौखिक परीक्षा नहीं दी। कक्षाध्यापिका नीता सिंह ने खुद प्रश्नपत्र तैयार कर बच्चों को दिए। बच्चे प्रशभनपत्रों को देखकर आनंदित नजर आए। इस दौरान बच्चों ने फर्नीचर पर बैठकर इम्तिहान दिया।