अलीगंज क्षेत्र में धान की फसल में भरा पानी। संवाद
अलीगंज। पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से अंचल के खेतों में खड़ी फसलें एक बार फिर लहलहा उठी हैं। बादलों की मेहरबानी से सूखने के कगार पर पहुंच चुकी धान और बाजरा की फसल को जीवनदान मिल गया है। समय पर हुई इस वर्षा से किसानों के मुरझाए चेहरे खिल उठे हैं।
लगातार पड़ रही उमस और बारिश के अभाव में जमीन तपने लगी थी, जिससे खरीफ की फसलें सूखने लगी थीं। इस मूसलाधार व रुक-रुककर हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी लौट आई है, जिससे धान और बाजरा की फसलों को सबसे अधिक फायदा पहुंचा है। किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में भी मौसम ऐसा ही अनुकूल रहा, तो इस बार खरीफ सीजन की पैदावार बहुत अच्छी होगी। बारिश से पहले तेज धूप के कारण खेतों की मिट्टी सूख चुकी थी, जिससे किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए अतिरिक्त आर्थिक भार उठाना पड़ रहा था। नलकूपों से सिंचाई के बावजूद धान की फसल में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था, क्योंकि धान को अधिक पानी की आवश्यकता होती है, जो केवल प्राकृतिक वर्षा से ही पूरी तरह संभव हो पाता है।
हत्सारी गांव के किसान आनंद ने बताया कि यह बारिश बाजरा और धान दोनों फसलों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। समय पर पानी मिलने से फसलों का विकास तेजी से होगा और अब कुछ दिनों तक खेतों की सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। इससे डीजल और बिजली का खर्च बचेगा, जिससे खेती की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ने की उम्मीद मजबूत हुई है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि खरीफ सीजन में इस समय होने वाली वर्षा फसलों के लिए बेहद लाभकारी साबित होती है।