एटा। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ने और होर्मुज बंद होने से स्थानीय कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में इसका असर जलेसर के पीतल उद्योग पर पड़ने के आसार खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बाधित बंद से पीतल, जिंक के कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। वहीं कारोबारियों को ऑर्डर भेजने को लेकर भी चिंता हो रही है।
जलेसर में पीतल के घुंघरू, घंटे का बड़ा कारोबार है। यह कारोबार ओडीओपी में भी शामिल है। कुछ फर्म एक्सपोर्ट भी कर रही हैं।
यहां घुंघरू-घंटी उद्योग के साथ-साथ मेटल के दुर्लभ आइटम बनाए जाते हैं। एक जनपद-एक उत्पाद योजना के अंतर्गत अब तक घुंघरू-घंटी को ही शामिल किया गया है। जलेसर के पीतल उत्पादों से जुड़े छोटे-बड़े 100 के करीब कारोबारी हैं। यह उद्योग मुख्य रूप से पीतल, तांबा और जस्ता जैसी धातुओं पर निर्भर करता है। खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में भारी अस्थिरता आ गई है। आयातित स्क्रैप और कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से आने वाले दिनों में इनकी कीमतों में बेतहाशा वृद्धि तय मानी जा रही है। इसके अलावा, युद्ध के कारण कच्चे तेल के दामों में उछाल से फैक्टरियों की संचालन लागत और माल ढुलाई काफी महंगी हो गई है।
निर्यातकों के लिए बढ़ा जोखिम
जलेसर से मध्य पूर्व सहित कई देशों को पीतल के सजावटी सामान और घुंघरू-घंटी का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है। लाल सागर और खाड़ी मार्गों पर जहाजों पर हमले के खतरे को देखते हुए शिपिंग कंपनियों ने या तो मार्ग बदल दिए हैं या फिर बीमा प्रीमियम कई गुना बढ़ा दिया है। क्रिसमस के कारण विंड चाइम्स, सजावट के एंटिक आइटमों के ऑर्डर अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन आदि देशों से आना शुरू हो गए हैं। इन्हें आगामी दो-तीन महीनों में डिलीवर करना है। यही हालात रहे तो आगामी दिनों में व्यापारियों की मुश्किल बढ़ सकती है।
कारीगरों की आजीविका पर खतरा
स्थानीय पीतल कारखानों के मालिकों और हस्तशिल्पियों का कहना है कि वैश्विक मंदी से धीरे-धीरे उबर रहे इस कुटीर उद्योग के लिए यह युद्ध एक बड़ा झटका है। युद्ध लंबा खिंचने पर कच्चे माल का संकट गहराएगा, जिससे छोटे कारखानों को उत्पादन कम करना पड़ेगा। इसका सीधा असर भट्टियों पर काम करने वाले हजारों कारीगरों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा। घुंघरू उद्योग मंडल ने सरकार से निर्यातकों को राहत देने और कच्चे माल की सुलभता बनाए रखने का अनुरोध किया है।
दोबारा युद्ध शुरू होने से पीतल और जिंक की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसके दाम बढ़ने के आसार हैं। इसका असर कारोबार पर पड़ेगा।
अमित मित्तल, कारोबारी
युद्ध के कारण ट्रांसपोर्टेशन पहले ही महंगा हो चुका है। यही हालात रहे तो महंगाई और बढ़ सकती है। इससे कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
आशीष मित्तल, कारोबारी