मेडिकल कॉलेज के टीबीसीडी विभाग में मरीजों को देखते चिकित्सक। संवाद
एटा। मेडिकल कॉलेज के टीबीसीडी विभाग में सांस फूलने, खांसी और टीबी के ज्यादातर मरीज उपचार लेने के लिए आ रहे हैं। खांसी की दवा लेने आने वाले मरीजों में जांच के बाद टीबी के लक्षण मिल रहे हैं। रोजाना 150 से अधिक मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। चिकित्सक का कहना है कि तीन महीने से अधिक खांसी होने पर टीबी की आशंका हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज के टीबीसीडी विभाग में सुबह 8 बजे से मरीजों आने शुरू हो जाते हैं। युवा से बुजुर्ग वर्ग तक के मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। डॉ. शिवांग ने बताया कि कुछ मरीजों में तीन महीने से ज्यादा खांसी होने पर टीबी के लक्षण मिल रहे हैं। रोजाना 10 से अधिक मरीज खांसी की समस्या के आ रहे हैं जिनमें कम से कम चार में टीबी के लक्षण मिल जाते हैं। उनका नाम अलग से लिखकर जांच कराई जाती है।
बताया कि 40 से 50 मरीज सांस फूलने की समस्या के आते हैं। अस्थमा और टीबी के पुराने मरीज भी उपचार और परामर्श के लिए आते हैं। प्रदूषण अधिक होने की वजह से लोगों की सांस फूल रही है। उन्होंने कहा कि धूल और मिट्टी जैसे इलाकों में सावधानियां बरते और तीन महीने से खांसी होना टीबी का लक्षण है इसलिए डाॅक्टर को अवश्य दिखाए।