उत्तर प्रदेश के एटा जिले में विद्युत कनेक्शन जारी किए जाने के लिए 60 हजार रुपये की रिश्वत मांगने वाले अलीगंज के अवर अभियंता अर्जुन कुमार को अदालत में पेशी के बाद बुधवार को मेरठ जेल भेज दिया गया। अब अवैध कमाई की पड़ताल के लिए उसके घर-ठिकानों पर तलाशी ली जाएगी।
अलीगंज के मोहल्ला काजी निवासी आबिद अली ने एंटी करप्शन थाना अलीगढ़ में शिकायत की थी। बताया था कि वह हत्सारी रोड पर कबाड़ का काम करता है। यहां पांच किलोवाट के कनेक्शन के लिए 21 नवंबर को आवेदन किया। कर्मचारियों ने बताया कि जेई अर्जुन कुमार ही कनेक्शन का काम और मौका मुआयना करेंगे। जेई से मुलाकात होने पर उन्होंने कनेक्शन के लिए 60 हजार रुपये मांगे। 50 हजार से कम में काम न होने की बात कह दी। पहले 30 हजार और कनेक्शन के समय 20 हजार रुपये देने की बात तय हुई।
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बिजली घर पर बुलाया था
एंटी करप्शन टीम ने पड़ताल की तो शिकायत सही मिली। इसके बाद थाना स्तर से ट्रैप टीम गठित की गई और एसपी एंटी करप्शन व डीएम एटा से अनुमति लेकर कार्रवाई की गई। 3 दिसंबर को निरीक्षक राखी के नेतृत्व में अलीगढ़ से एटा आई। गवाह के तौर पर कलेक्ट्रेट से दो कर्मचारियों को साथ लिया। 30 हजार रुपये के 500-500 के नोटों के नंबर नोट कर व उन पर पाउडर इस्तेमाल कर आबिद को दिए गए। फोन पर बात करने के बाद जेई ने आबिद को अलीगंज स्थित बिजली घर पर बुलाया। वहां जाकर आबिद ने रुपये जेई को दे दिए।
इशारा मिलते ही टीम ने दबोचा
आबिद का इशारा मिलते ही पहले से मौजूद टीम ने अंदर घुसकर जेई को पकड़ लिया और रुपये बरामद कर लिए। इस बीच जेई विरोध करने लगा, तो टीम उस पकड़कर अलीगंज थाने ले गई। आगे की कार्रवाई वहां बैठकर की गई। निरीक्षक राखी ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद टीम जेई को मेरठ ले गई और एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया। प्रभारी निरीक्षक थाना एंटी करप्शन अलीगढ़ देवेंद्र सिंह ने बताया कि अदालत से जेई को जेल भेज दिया गया है। प्रक्रिया के अनुसार उसके घर व अन्य ठिकानों की तलाशी ली जाएगी।
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रिश्वतखोरी के आरोपों में कई बार घिर चुका है विद्युत निगम
भले ही रिश्वतखोरी में रंगे हाथों पकड़े जाने का यह पहला मौका है, लेकिन भ्रष्टाचार की तमाम शिकायतें, आरोप इससे पहले भी रहे हैं। खासतौर से जलेसर खंड में तो लाइनमैन से लेकर अभियंता स्तर तक के कर्मियों की शिकायतें काफी ज्यादा रहीं हैं। कई फोन कॉल की क्लिप भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं। इस पर अधिकारियों को कार्रवाई भी करनी पड़ी।