एटा। इतनी बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव केस आ रहे हैं कि निगरानी करने में प्रशासन-पुलिस के संसाधन कम पड़ते जा रहे हैं। ऐसे में स्वयंसेवियों की मदद ली जा रही है। एनएसएस और एनसीसी कैडेट्स को भी निगरानी के लिए तैयार किया जा रहा है। ताकि होम आइसोलेशन वाले घरों से लोगों की आवाजाही न हो।
इस बार पिछले साल की तरह न तो लॉकडाउन किया गया है और न ही कन्टेनमेंट जोन में बैरिकेडिंग ही की जा रही है। इस कारण होम आइसोलेट होने वाले मरीजों और उनके परिजनों को घर पर रोके रखने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं है। केवल निगरानी के सहारे ही यह व्यवस्था है। यूं तो पुलिस महकमे से कई थाना प्रभारियों से लेकर चौकीदारों तक की ड्यूटी कन्टेनमेंट जोन में निगरानी के लिए लगाई गई है। लेकिन लगातार बढ़ रहे जोन को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। ऐसे में निगरानी में पुलिसकर्मियों के सहयोग के लिए स्थानीय स्वयंसेवियों, एनएसएस और एनसीसी कैडेट्स चिह्नित किए जा रहे हैं।
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आंकड़ों की नजर से
293 माइक्रो कन्टेनमेंट जोन
135 क्लस्टर कन्टेनमेंट जोन
1554 होम आइसोलेट मरीज
14 थाना प्रभारी
35 उपनिरीक्षक
20 मुख्य आरक्षी
52 आरक्षी
39 होमगार्ड
94 चौकीदार
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कन्टेनमेंट जोन की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में योजना तैयार की गई है कि पुलिस के अलावा स्वयंसेवी, एनएसएस, एनसीसी कैडेट्स का भी सहयोग लिया जाए। पूरी सुरक्षा प्रदान कर निगरानी में उनसे काफी मदद मिलेगी। - उदय शंकर सिंह, एसएसपी