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Completed the job by misleading the officers, the department also issued pension

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एटा। नगर पालिका के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को भ्रष्टाचार की शिकायतों के आधार पर बर्खास्त कर दिया गया। जिस पर उसने हाईकोर्ट में रिट दायर की। बाद में शपथपत्र दिया कि चतुर्थ श्रेणी पद नौकरी करता रहेगा, पदोन्नति नहीं मांगेगा, लेकिन कुछ समय बाद फिर सांठगांठ कर लिपिक पद पा लिया। सेवानिवृत्ति के बाद पालिका प्रशासन ने सबकुछ जानते हुए उसकी पेंशन पत्रावली स्वीकृत कर दी है। आला अफसरों को गुमराह कर उसने अपनी नौकरी पूरी कर ली।
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कर्मचारी बहोरीलाल तैनाती के समय से ही विवादों में रहे हैं। जिनके खिलाफ लगातार डीएम से लेकर मंडलायुक्त तक शिकायतें होती रहीं। बहोरीलाल की नियुक्ति जनवरी 1987 में माली पद पर की गई थी। शिकायतों पर उसे सितंबर 1998 में सेवा से पृथक कर दिया गया। जिसके विरुद्ध बहोरीलाल ने मंडलायुक्त आगरा से अपील की, जिसे निरस्त कर दिया गया। बाद में उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की। इस बीच पालिका प्रशासन और कर्मचारी में सांठगांठ हुई। कर्मचारी से एक शपथ पत्र लिया गया।
जिसमें उसने लिखा कि अगर उसे माली पद पर बहाल कर दिया जाए तो भविष्य में कभी दूसरे पद या प्रोन्नति की मांग नहीं करूंगा। ऐसा करता हूं तो सेवा से पृथक कर दिया जाए। इस शपथपत्र के आधार पर उसे जनवरी 2001 फिर सेवा में ले लिया। इसके बाद पालिका ने 2013-14 में फिर उसे लिपिक के रूप में प्रोन्नति देकर प्रकाश निरीक्षक के पद पर तैनात कर दिया। सितंबर 2021 में बहोरीलाल की सेवानिवृत्ति के बाद इसी पद के अनुरूप उनकी पेंशन पत्रावली भी स्वीकृत की जा चुकी है। जिसे लेकर मानवाधिकार इमरजेंस हेल्प्लाइन की ओर से डीएम को शिकायत की गई है। उन्होंने कर्मचारी द्वारा सेवा पुस्तिका बदलने का भी आरोप लगाया है।
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