नशा करने वालों के जीवन के बुझते चिराग को जलाने की आखिरी उम्मीद फिलहाल पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। क्योंकि नशे के साथ एड्स पर वार की उम्मीद जगाने वाली योजना पर फिलहाल ब्र्रेक लग चुका है।
कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रेडियो पर मन की बात नशे पर वार की बात कही गई थी, मगर प्रधानमंत्री के इस मिशन पर सिगरेट की धुआं की तरह ही धुंध उड़ती दिखाई दे रही है। इंजेक्शन का नशा लेकर जिंदगी समाप्त कर ऐसे लोगों के लिए साल के शुरूआत में एक योजना बनाई गई थी। इसके तहत जिला अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र खोला जाना था।
साल के आखिरी तक योजना तो शुरू नहीं हो पाई, मगर इस पर शुरू होने से पहले ब्रेक जरूर लग गया। बता दें कि योजना के अंतर्गत प्राइवेट चिकित्सक, फार्मासिस्ट, एक काउंसलर व एक कर्मचारी का चयन होना था। जो जनपद स्तर पर ही होना था, मगर किसी कारणों की वजह से चयन नहीं हो पाया। बता दें कि जिला अस्पताल में करीब 200 मरीज ऐसे रजिस्टर हैं जो नशे के आदी हैं। जिले में इनकी संख्या हजारों के पार है, जो इंजेक्शन से नशा लेते हैं।
किसी कारणवश केंद्र सरकार द्वारा इस योजना पर रोक लगा दी है। योजना पर ब्रेक लगने से पहले उन्होंने लखनऊ मुख्यालय को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि वह अलीगढ़ से स्टाफ का चयन कर एटा में खोले जाने वाले नशा मुक्ति केंद्र में भेजें।
- डॉ. आरएस शुक्ल, सीएमएस एटा।
ऐसे होता नशा करने वालों का इलाज
ब्यूप्रीनोरफिन टेबलेट नशे के आदी लोगों को जब तक दी जाती, जब तक उनकी नशे की लत न छूट जाए। यह टेबलेट नोडल अधिकारी चिकित्सक द्वारा नशा करने वालों को दी जाती। साथ ही नशा करने वालों की काउंसलिंग भी होती। यह योजना नाको राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था ने चलाई थी। इसके लिए जिला अस्पताल में नशा मुक्ति केंद्र खोला जाना था। योजना के बाद एड्स के साथ-साथ नशे पर काफी हद तक अंकुश लग पाता।