एटा। इन दिनों बुखार का प्रकोप है। कोई वायरल तो कोई डेंगू और मलेरिया से परेशान है। शनिवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में सुबह से ही मरीज बड़ी संख्या में पहुंचे। मेडिसिन विभाग में 530 मरीजों का उपचार किया गया। 5 व्यक्तियों में डेंगू की पुष्टि हुई। फिरोजाबाद जनपद निवासी बच्चे की बुखार से मौत हो गई।
फिरोजाबाद जनपद के पाड़म निवासी एक वर्षीय वंश को परिजन बुखार में शनिवार सुबह मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। यहां चिकित्सक को दिखाने के बाद उसे वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया गया। उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। दोपहर बाद उसकी मौत हो गई। परिजन ने बताया कि शुक्रवार शाम को बच्चे को बुखार आया था। गांव के चिकित्सक ने सीरप बता दिया। उसको खरीदकर पिलाया। हालत बिगड़ने पर शनिवार को यहां लेकर आए थे।
वहीं, गांव सियपुर निवासी हर्षिता (19) को डेंगू के चलते वार्ड में भर्ती किया गया। उसने बताया कि 10 दिन से बुखार आ रहा था। इसके अलावा फिरोजाबाद के गांव पतारा निवासी ज्ञान सिंह (55) को डेंगू के चलते भर्ती किया। इनको 8 दिन से बुखार आ रहा था। गांव रामनगर जिठौली निवासी अंशू (21), मिलिक निवासी शालिनी (26) व अमृतपुर निवासी आर्यन (11) को डेंगू की पुष्टि हुई। तीनों की एलाइजा के जरिए जांच कराई कराई गई। उसमें ये पॉजिटिव पाए गए हैं।
मेडिसिन विभाग में शनिवार को सुबह से ही मरीजों की लंबी लाइन लग गई थी। कई मरीज थक- हार कर फर्श पर ही बैठ गए थे। मरीजों ने बताया 8 बजे आ गए थे। पर्चा बनवाने के दौरान लाइन में लगना पड़ा। इसके बाद चिकित्सक को दिखाने आए तो यहां भी लाइन में लगना पड़ रहा है। बुखार के कारण परेशान हैं। इसलिए फर्श पर ही लाइन में बैठ गए। लाइन से निकल जाएंगे तो चिकित्सक को दिखा नहीं पाएंगे।
विभाग के बाहर लाइन में कई मरीज फर्श पर बैठे थे। इनमें से अधिकांश बुखार से ग्रसित थे। चिकित्सकों ने बताया कि दो दिन से बुखार के रोगियों की संख्या में इजाफा हो गया है। रोगियों की संख्या 270 से 290 तक जा रही है। शनिवार को 300 के लगभग बुखार से ग्रसित पहुंचे।
बदला गया कक्ष
मेडिसिन विभाग में चिकित्सक दो कक्षों में बैठ रहे हैं। एक कक्ष में वेंटीलेशन की व्यवस्था नहीं थी। एसी भी नहीं लगा है। मरीज एक साथ अधिक संख्या में पहुंच जाते हैं। ऐसे में उमस हो जाती है। शुक्रवार को एक चिकित्सक की हालत खराब हो गई थी। शनिवार को चिकित्सक का कक्ष बदल दिया गया। उन्हें 103 नंबर कक्ष में बैठने को कहा गया।
मानसिक रोगों की वजह बनती है चिंता
एटा। सकीट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत शनिवार को वृहद मानसिक स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। लोगों को बताया गया कि चिंता मानसिक रोगों की वजह बनती है, इससे बचें।
सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड ने शुभारंभ किया। सीएमओ डाॅ. उमेश त्रिपाठी ने कहा कि ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए। बताया नींद न आना या देर से आना, बीच में नींद टूट जाना, तनाव, घबराहट, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, जीवन के प्रति निराशा, आत्महत्या का विचार आना, आत्म विश्वास की कमी महसूस होना, बेवजह शक करना आदि मानसिक रोग के लक्षण हैं।
एमओआईसी डॉ. रवी सिंह ने बताया कि शिविर में 26 लोगों का मानसिक परीक्षण कर उपचार दिया गया। डिप्टी सीएमओ डॉ. सतीश नागर, डॉ. रवि रंजन डॉ. अभिषेक राजपूत, डॉ.दीपक चौहान, रविन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।
जांच में एक क्लीनिक मिली अपंजीकृत, किया सील
एटा। जिले में तमाम क्लीनिक, पैथोलॉजी और नर्सिंग होम बिना पंजीकृत के ही संचालित हो रहे हैं। शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्लीनिकों पर पहुंचकर उनकी जांच किया। इस दौरान एक क्नीनिक अपंजीकृत मिली, जिसे टीम ने सील कर दिया।
डिप्टी सीएमओ डॉ. सर्वेश कुमार ने बताया कि शनिवार को जिरसमी नहर के पास संचालित एक क्लीनिक की जांच की गई। यहां मरीजों का उपचार किया जा रहा था। लेकिन क्लीनिक संचालक की तरफ से कोई कागजात नहीं दिखाया जा सका। इसके अलावा जांच में क्लीनिक अपंजीकृत मिली। इस पर क्लीनिक को सील किया गया। बाद में पीपल अड्डा पर संचालित एक क्लीनिक पर टीम पहुंची। जांच में यह क्लीनिक भी अपंजीकृत मिली। टीम की तरफ से संचालक को नोटिस दिया गया। तीन दिन में जवाब न मिलने पर स्वास्थ्य विभाग संचालक के खिलाफ आगे कार्रवाई करेगा।