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संडे स्पेशल : अष्टापद मंदिर से होगी मुवार टूम की पहचान

Sun, 25 Aug 2024 02:06 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
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एटा। सकीट कस्बे में 150 वर्ष से अधिक पुराना मुवार टूम अब अष्टापद मंदिर नाम से जाना जाएगा। पूर्व में यह मुड़िया मंदिर नाम से भी पहचान रखता था। जैन समाज ने इसका कायाकल्प कराकर 81 फीट ऊंचा बनवाया है।
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सकीट का एतिहासिक स्थल मुवार टॉम प्राचीन समय से अपनी सुंदरता से प्रसिद्ध रहा है। साथ ही उत्कृष्ट कारीगरी का भी उदाहरण है। इसका निर्माण करीब 150 वर्ष पूर्व कराया गया था। किन्हीं कारणवश यह पूरा नहीं बन सका। सुरेंद्र कुमार मुवार के पूर्वजों ने स्थापना कराई थी, जिसके चलते इसका नाम मुवार टूम पड़ा था। लोग मुड़िया मंदिर के नाम से इसे जानते थे। निर्माणाधीन मुवार टूम दिनों दिन क्षीण होता जा रहा था।
यह मंदिर प्राचीन जैन मंदिर परिसर से मात्र 50 मीटर की दूरी पर है। जैन समाज के लोगों ने सुरेंद्र मुवार से अनुरोध किया तो उन्होंने इसे वर्ष 2000 में श्री दिगंबर जैन मंदिर सकीट को दान कर दिया। इसके बाद जैन समाज ने अष्टापद आदिनाथ दिगंबर जैन लाल मंदिर के रूप में इसका जीर्णोद्धार शुरू कराया। अब यह बनकर तैयार है। संवाद
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बनाए गए हैं तीन तल
मंदिर में 3 तल बनाए गए हैं, जो पाताल लोक, मध्यलोक, उर्धलोक के रूप में हैं। अष्टभुजाकार नक्शे से इसे अष्टापद यानी कि आठ पैर पर रुका हुआ कैलाश पर्वत प्रदर्शित किया है। जो जैन धर्म के पहले तीर्थंकर आदिनाथ की मोक्ष स्थली है। कल्पवृक्ष वेदिका पर आदिनाथ भगवान की चतुर्मुखी प्रतिमाओं को विराजमान किया गया है।


विकासखंड क्षेत्र में सबसे ऊंचा मंदिर
श्री दिगंबर जैन सेवा समिति के कार्यकाल में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया है। वर्तमान में इसके अध्यक्ष मुकेश चंद्र जैन ने बताया कि यह मंदिर सकीट विकासखंड क्षेत्र में सबसे ऊंचा है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को इसकी भव्यता महसूस होगी। वहीं, सकीट कस्बे के लोगों को यह गौरवान्वित करेगा।
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