एटा। चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की गई। शहर के पथवारी मंदिर, जनता दुर्गा मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भी विधिवत पूजा हुई। स्कंदमाता उनको मातृत्व का रूप माना जाता है। इनकी पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और साधक को हर दुख-दर्द से छुटकारा मिलने के साथ सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
जनता दुर्गा मंदिर के पुजारी चंद्रप्रकाश गुप्ता गांधी ने बताया कि हिंदू शास्त्रों के अनुसार मां दुर्गा का स्कंदमाता स्वरूप काफी शुभ माना जाता है। मां के मनमोहक स्वरूप की बात करें, तो चार भुजाएं है। जिसमें दो में कमल और एक हाथ में बालक स्वरूप कार्तिकेय जी और चौथे हाथ से आशीर्वाद देती हुए नजर आती हैं। मां कमल में विराजमान रहती हैं और वाहन की बात करें, तो वह सिंह है।
बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन यानी शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में भक्तजनों ने मंदिर व घरों में स्कंदमाता की पूजा की है। इसके बाद मां दुर्गा और उनके स्वरूपों को फूल, माला, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, वस्त्र आदि चढ़ाए गए। इसके बाद भोग में केला, मिठाई खिलाने के साथ बीड़ा का भोग लगाया गया। घी का दीपक और धूप जलाकर मां दुर्गा चालीसा, मंत्र के साथ दुर्गा सप्तशती पाठ, स्कंदमाता मंत्र का जाप कर आरती उतारी गई।