एटा। जुलाई में डिपो की एक बस को लखनऊ की टीम द्वारा चेक किया गया था। इस दौरान बस में 52 बेटिकट यात्री मिले थे। इसी को लेकर लखनऊ के अधिकारियों की सीधी नजर डिपो पर टिक गई है। लखनऊ में बैठे अधिकारी हर दो घंटे पर विवरण मांग रहे हैं। किस रूट पर कितनी बसें गईं? बस में कौन चालक-परिचालक हैं? इससे डिपो के कर्मचारियों में अफरा तफरी का माहौल है।
एक समय एटा डिपो आय के मामले में मेरिट की सूची में मंडल में पहले, स्थान पर रहता था। बीते कुछ वर्ष से डिपो की आय में लगातार गिरावट हो रही है। कुछ माह पूर्व तत्कालीन एआरएम मदनलाल की उच्चाधिकारियों को शिकायत मिली थी। इस पर आरएम ने मंडल के रीजनल अकाउंटेंट को बसों का संचालन दुरुस्त कराने की जिम्मेदारी दी थी। जहां अकाउंटेंट द्वारा कुछ दिनों बसों का संचालन डिपो से कराया गया।
इस दौरान करीब तीन से चार लाख रुपये प्रतिदिन की आय में वृद्ध हुई। उनके जाते ही स्थिति फिर जस की तस हो गई। बस स्टैंड प्रभारी अजय पाल यादव ने बताया कि बीते कुछ दिनों से बस स्टैंड से जो बस किसी भी रूट पर रवाना होती है। उसकी जानकारी रजिस्टर पर नोट कर प्रत्येक 2 घंटे पर लखनऊ के उच्चाधिकारियों को व्हाट्सएप के माध्यम से दी जा रही है।