चालू वित्तीय वर्ष खत्म होने में अब सिर्फ डेढ़ माह का समय रह गया है, लेकिन शासन से अब तक कई विभाग को मांग के सापेक्ष पूरा बजट नहीं मिल पाया है। इसमें से कई विभाग ऐसे हैं, जिन्हें पूरी साल में फूटी कोड़ी तक नहीं मिली। कुछ विभागों को शासन ने बजट के नाम पर खानापूर्ति कर दी है। बजट न मिलने से योजनाएं अधर में लटकी हैं।
बजट के अभाव में सबसे अधिक दिक्कतें डॉ. राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम्य विकास योजना में आ रही हैं। दरअसल इन गांवों में जो भी काम बजट से होने हैं, उन सब में विभागों द्वारा बजट का रोना रोया जा रहा है। अब चाहे वह आरईएस विभाग हो, आंगनबाड़ी, नेडा हो या फिर अन्य विभाग लगभग सभी योजनाओं में समय से बजट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। हालात यह है कि बजट के अभाव में पिछले वित्तीय वर्ष के काम या तो अब तक पूरे नहीं हुए हैं, या फिर देरी से बजट मिलने से उन पर कार्य अब शुरू हुआ है। ऐसे में सवाल यह भी खड़ा होता है कि जब चालू वित्तीय वर्ष में अब तक कार्य पूरे नहीं हुए तो अगले वित्तीय वर्ष में प्रस्तावित कार्यों को शासन कैसे पूरा करवा पाएगा।
आंगनबाड़ी केंद्रों के स्थापना की रफ्तार धीमी
जिले में अब तक चयनित हुए सभी लोहिया गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना होनी थी, लेकिन बजट के अभाव में इस योजना की भी रफ्तार धीमी है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2012-13 के चयनित 18 लोहिया गांवों में से सात में भवन का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं, शेष 11 गांवों के लिए शासन से 50 प्रतिशत धनराशि मिली, जिसे निर्माण कार्य में लगा दिया गया है। वर्ष 2013-14 के चयनित 24 लोहिया गांवों में भवन निर्माण के लिए 50 प्रतिशत ही धनराशि प्राप्त हुई है। वर्ष 2014-15 के लिए विभाग से अभी कोई बजट नहीं मिला है। बाल विकास सेवा योजना की जिला कार्यक्रम अधिकारी वीना सोलंकी ने बताया कि विभाग की ओर से शासन को बजट का मांग पत्र भेज दिया गया है।
नहीं हो पा रही गलियां पक्की
लोहिया गांवों में गलियां पक्की करने का काम आरईएस विभाग द्वारा कराया जाता है, लेकिन शासन द्वारा समय से बजट न मिल पाने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हालात यह हैं कि वित्तीय वर्ष 2013-14 के शेष बजट की धनराशि विभाग को अब जनवरी माह में आकर मिली है। वहीं, वर्ष 2014-15 के लिए विभाग ने 24 लोहिया गांवों का बजट शासन को भेजा था। इसमें विभाग को अब तक सिर्फ 26 लाख ही प्राप्त हुए हैं।
सोलर लाइट के लिए भी बजट नहीं
नेडा विभाग ने वित्तीय वर्ष 2014-15 में सोलर लाइट लगाने के लिए 51.26 लाख का प्रस्ताव बनाकर भेजा था। मगर 11 माह बाद भी विभाग खाली हाथ है। शासन से विभाग को न तो सामान मिला और न ही कोई धनराशि प्राप्त हुई। परियोजना अधिकारी चंद्रशेखर का कहना है कि अब शासन ने 60.50 प्रतिशत सोलर लाइट के सामान के लिए आदेश दे दिया है। यह विभाग को मार्च के पहले सप्ताह में प्राप्त होने की उम्मीद है।
छात्रों की ड्रेस के लिए पूरा धन नहीं मिला
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बीपीएल व नॉन बीपीएल छात्रों को वितरित की जाने वाली ड्रेस की धनराशि शत प्रतिशत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि छात्रों को ड्रेस वितरित की जा चुकी है। विभाग ने बताया कि अध्यापकों द्वारा अपनी ओर से ड्रेस वितरित की गई है। अब अध्यापक अपना पैसा लेने के लिए विभाग के चक्कर काट रहे हैं। विभाग की ओर से मांग पत्र भेजा जा रहा है।
ड्रेस के विभागीय आंकड़े
छात्र संख्या प्राप्त बजट शेष बजट
नॉन बीपीएल 37957 6570000 7412800
बीपीएल 143810 43143000 11073500