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डीजल 13.50 रुपये सस्ता, किराए में एक ही पैसा घटा

Thu, 05 Feb 2015 11:44 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला एटा
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एटा। पेट्रो मूल्यों की गिरावट का असर बाजारों में नहीं दिख रहा। महीनों बाद भी संबंधित उत्पादों के भाव जस के तस हैं। वहीं रेल, बस एवं अन्य यात्राओं के किराए में भी कोई गिरावट नहीं हुई।
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डीजल-पेट्रोल के गिरते दामों का लाभ आम आदमी तक नहीं पहुंच रहा। 12 से 14 रुपये प्रति लीटर की मंदी का लाभ उठा रहे क्रेता भी इसका लाभ गरीबों को नहीं दे रहे। इतना ही नहीं सरकारें एवं अन्य कंपनियां भी इस बारे में नहीं सोच रहीं। इनकी मनमानी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सात माह में डीजल पेट्रोल के दामों में जहां तेरह रुपए से लेकर 15 रुपए प्रति लीटर की गिरावट आई है वहीं इनके द्वारा पेट्रो उत्पादों के दामों में कोई भी रियायत नहीं की गई। भारत सरकार ने जहां रेल किराया एवं भाड़े में कोई रियायत नहीं की है।

 वहीं प्रदेश परिवहन विभाग ने भी पूर्व में बढ़े किराए को कम नहीं किया है। निजी ट्रांसपोर्टेशन की मनमानी तो चरम पर है। उनके द्वारा पूर्व में बढ़ाए गए किराए भी जस के तस हैं। वे रोडवेज एवं रेल विभाग का सहारा लेकर किराया कम करने को राजी नहीं हैं।
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परिवहन विभाग का पूर्व किराया लगभग 80 पैसे प्रति किलोमीटर था। हाल में गिरे डीजल के दाम के बाद निगम ने इसे एक पैसा घटाकर 79 पैसे प्रति किलोमीटर कर दिया है। इस संबंध में कोई नए निर्देश नहीं हैं।
- संजीव कुमार यादव, एआरएम

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पेट्रो उत्पादों की मंदी का असर वस्त्र उद्योग पर भी संभावित है। लेकिन इसका लाभ अभी तक आम आदमी तक नहीं पहुंच रहा। अभी इसका लाभ केवल उद्योगों एवं बड़े कारोबारियों तक ही पहुंच रहा है। आने वाले दिनों में नीचे तक संभावित है।
- दिनेश जैन, वस्त्र कारोबारी
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पेट्रोल-डीजल के गिरे भाव का लाभ गरीबों को नहीं मिल रहा। किराया से लेकर भाड़े तक में उन्हें उतना ही पैसा देना पड़ रहा है। आज भी रोज उन्हें सब्जी की गाड़ी का भाड़ा उतना ही देना पड़ रहा है जितना सात माह पहले था। ऐसे में उन पर महंगाई का बोझ जस का तस है।
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- बाल किशन, सब्जी विक्रेता
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