गुरुवार रात से घुमड़ रहे बादल शुक्रवार सुबह को बरस गए। इससे तापमान में गिरावट आई। लेकिन कुछ ही देर में रुकी बारिश से किसान मायूस हो गए। इनका कहना है कि इस बारिश से खेतों की जुताई, धान की रोपाई एवं अन्य कृषि कार्य शुरू नहीं हो सकेंगे।
दशहरा से घुमड़ रहे बादल शुक्रवार को बूंदाबांदी की शुरुआत तक ही रहे। सुबह सात बजे बजे शुरू हुई बूंदाें से लोग झूम उठे। गर्मी से जूझ रहे लोगों की सुबह सुहानी हो गई। अचानक गिरे तापमान से राहत मिली। लेकिन लोगों की खुशी कुछ ही देर तक रह सकी। बारिश के साथ ही खत्म होने वाली यह फसलें शुक्रवार को हल्की बारिश के साथ बच गईं। किसानों का कहना है कि बारिश के डर से किसान इन्हें सस्ते दामों पर ही निकालने में लगा हुआ है। क्योंकि बारिश के साथ ही यह खेतों में ही खत्म हो जाएंगी।