एटा। कलेक्ट्रेट में भाजपाइयों का धरना बुधवार आधी रात तक चलता रहा। जिला पंचायत सदस्य पदों की मतगणना में गड़बड़ी के आरोप में वह धरने पर बैठे थे। वार्ड संख्या 10 में अभिलेखों का दोबारा मिलान किया गया। इसमें गलती पकड़ में भी आई। छह बूथों के मतों की फीडिंग ही नहीं की गई थी। इन्हें मिलाते ही भाजपा प्रत्याशी गजेंद्र पाल धनगर विजयी हो गए। सपा प्रत्याशी साधना देवी को जारी प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया। इसके बाद भाजपाइयों ने धरना समाप्त कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
बुधवार देरशाम से यह हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू हुआ, जिसमें सत्ताधारी दल के नेताओं ने ही प्रशासन के विरोध में मोर्चा खोला। डीएम डॉ. विभा चहल ने वार्ड 10 के रिकॉर्ड का दोबारा मिलान कराया। पूर्व में सपा प्रत्याशी को 5787 तथा भाजपा प्रत्याशी को 5446 मत मिले थे। बुधवार दोपहर सपा प्रत्याशी को जीत का प्रमाण पत्र भी दे दिया गया।
देरशाम जिला चुनाव प्रभारी एमएलसी धर्मवीर प्रजापति, मारहरा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी, अलीगंज विधायक सत्यपाल सिंह राठौर, जलेसर विधायक संजीव दिवाकर, भाजपा जिलाध्यक्ष संदीप जैन सहित पार्टी के तमाम पदाधिकारी और कार्यकर्ता कलक्ट्रेट में जमीन पर ही धरना देने बैठ गए। देररात डीएम ने मतगणना अभिलेखों का मिलान कराया।
आरओ एवं सीडीओ अजय प्रकाश ने बताया कि कंप्यूटिंग सीट में गलती से बूथ संख्या 28, 29, 125, 152, 170 और 175 की फीडिंग ही नहीं हो सकी थी। इसे सही कराने के बाद संशोधित परिणाम के आधार पर साधना देवी को 6115 और गजेंद्र पाल को 7113 मत प्राप्त हुए। 998 मतों से विजयी गजेंद्र को रात में ही प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। हालांकि प्रशासन के इस निर्णय से भाजपाइयों का उबाल कुछ कम हुआ। लेकिन उन्होंने डीएम से गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग रखी और धरना समाप्त कर चले गए।