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अधिक मात्रा और असंतुलित मेल के काढ़े से बचें

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एटा। कोरोना से बचने के लिए लोगों ने काढ़े का प्रयोग बढ़ा दिया है। बिना पूरी जानकारी के दिन में कई-कई बार काढ़ा पी रहे हैं। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक मात्रा में काढ़ा नुकसान भी पहुंचा सकता है। वहीं, काढ़े में डाली जाने वाली सामग्री का संतुलित मेल भी जरूरी है।
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आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. नवीन गुप्ता बताते हैं कि आमतौर पर दालचीनी, तुलसी, काली मिर्च, सौंठ, गिलोय से काढ़ा बनाया जाता है। लेकिन इन सभी चीजों का सही अनुपात बेहद जरूरी है। कुछ लोग अधिक प्रभावी काढ़ा बनाने के उद्देश्य से इन चीजों की मात्रा बढ़ा देते हैं। यह सही नहीं है। इन चीजों का प्रभाव गर्म होता है। जो शरीर में गर्मी पैदा करती हैं।
अधिकता होने से एसिडिटी, मुंह में छाले, दाने, खट्टी डकार की समस्या हो सकती है। नाक से खून आ सकता है। इससे बचने के लिए किसी जानकार के परामर्श के अनुसार ही सही अनुपात में चीजों से बने काढ़ा को दिन में एक-दो बार ले सकते हैं।
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नाक में लगाएं अणु तेल
डॉ. नवीन बताते हैं कि नाक में अणु तेल लगाने या इसकी कुछ बूंदे डालने से फायदा मिलता है। इससे नाक में चिकनाहट की एक परत बन जाती है। जो वायरस को नाक के जरिए अंदर जाने से रोकती है।
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