प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल जनेश्वर मिश्र योजना में चयनित जिला मुख्यालय के समीप विकास खंड मुख्यालय शीतलपुर गांव बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है। आलम यह है कि बारिश होते ही पूरे गांव में जलभराव और कीचड़ होने से पानी घरों में घुसने लगता है। बिजली के तार लकड़ी के लट्ठों पर लटने से हादसे की आशंका बनी हुई है। गांव में सरकारी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवन में चल रहे हैं। जबकि इस गांव को एडीएम ने गोद ले रखा है।
शीतलपुर गांव जनेश्वर मिश्र योजना में चयनित होने पर 40 चालीस लाख रुपये की लागत से विकास कार्य कराए गए, लेकिन गांव के हालात बदतर हैं। गांव निवासी रुस्तम सिंह ने कहा कि सीसी मार्ग नीचे और नालियां ऊंची होने के कारण बारिश होते ही जलभराव होने पर गंदा पानी घरों में घुसता है। बारिश में कीचड़ और गंदगी से पूरे गांव में निकलना दूभर हो जाता है। सीसी मार्ग की गुणवत्ता खराब होेने से जर्जर हो चुका है। संजीव कुमार ने बताया कि गांव में बिजली के तार लकड़ी के लट्ठों पर लगे हैं। इसके चलते किसी भी वक्त हादसा होने की संभावना बनी हुई है। लोग खेतों में जाने से डरते हैं। प्रधान ने एक साल पहले राजीव गांधी योजना विद्युतीकरण योजना में गांव का चयन कराया, लेकिन अभीतक गांव में 90 बिजली के पोल पहुंचे हैं, तार और ट्रांसफार्मर का पता नहीं। प्राथमिक स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र किराए के भवन में चल रहा है। जबकि ब्लॉक क्षेत्र में कई स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों के नए भवन बनवाए गए हैं। प्रधान की माने तो गांव में पेयजल के लिए ओवरहेड मंजूर हो चुका है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। अब गांव को एडीएम ने गोद लिया है, शायद अब तस्वीर बदले।
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जनेश्वर मिश्र योजना से गांव में विकास कार्य हुए हैं, लेकिन भौगोलिक स्थित ऐसी है कि जलभराव रोका नहीं जा सकता। एडीएम ने पांच दिन पूर्व गांव गोद लिया और विकास कार्य कराने को लेकर प्रस्ताव भी मांगे हैं। सबसे बड़ी समस्या गांव में विद्युतीकरण की है। जल्द ही अफसरों से मिलकर ग्रामीणों को समस्याओं से निजात दिलाई जाएगी।
- भूपेंद्र सिंह यादव, ग्राम प्रधान शीतलपुर