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हाथों में नजर आते हैं कोलकाता और नगीना के बैत

Thu, 16 Feb 2017 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो एटा
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हाथों में नजर आते हैं कोलकाता और नगीना के बैत - फोटो : अमर उजाला
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सोरों का कांवड़ मेला की धूम तीर्थ नगरी में नजर आती है। किसी कांवड़िए के हाथ में कोलकाता या धामपुर नगीना की बैत होती है तो किसी के पैरों में बंधे घुंघरुओं में जलेसर की घंटियों की खनक सुनाई देती है। शृंगार की वस्तुओं में फिरोजाबाद की चूड़ियां, मोदीनगर व दिल्ली की बिंदी, वाराणसी व मथुरा के कंठी माला और फोम के बने खिलौने हाथरस से आते हैं। जब यह मेला लगता है तो कई उद्योग-धंधों पर चमक आ जाती है। स्थानीय व्यापारी बाहर से सामान मंगवाकर कांवड़ियों को सुलभ कराते हैं।   
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 मेले में मुख्य खासियत यह होती है कि इसमें आने वाली कांवड़ियों की टोली में हर कांवड़िये के सहायक के हाथ में एक बैत होता है। यह बैत या तो कोलकाता का बना होगा या फिर धामपुर नगीना का। यह मुख्य रूप से आत्म रक्षा के लिए रखा जाता है। साथ ही गले में सीटी भी बंधी होती जिसे वे बजाते चलते हैं। कांवड़ियों के पैरों में घुंघरू एवं कांवड़ों की सज्जा में लगाई जाने वाली घंटियों में जलेसर की खनक सुनाई देती है। शृंगार के सामान में फिरोजाबाद की चूड़ियों की खनक होती है, तो माथे पर लगाई जाने वाली बिंदी में मोदीनगर और दिल्ली की चमक होती है। वाराणसी और मथुरा की कंठी मालाओं से यहां शिवभक्त कावड़े सजाते हैं। कांच की तस्वीरें शिकारपुर से बनकर आती हैं। वहीं मोती की माला भी दिल्ली के अलावा अन्य स्थानों से आती हैं। फोम के बने खिलौने हाथरस से, तो कांवड़ सज्जा का मुख्य आकर्षण बनने वाले चुटिले पीर नगर शाहजहां से आते हैं।

यह मेला हजारों लोगों को रोजगार देता है। कांवड़ मेले की धूम आठ से दस दिन तक रहती है। लोगों को इसका इंतजार रहता है। पिछले समय में नोट बंदी के चलते मेला मार्गशीर्ष फीका रहा। इसबार कांवड़ मेला अच्छा रहने की उम्मीद है।
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- प्रवीन माहेश्वरी कारोबारी

कांवड़ मेला शुरू हो चुका है। अभी दूरस्थ इलाके के कांवड़िये पहुंच रहे हैं। मौसम सही बना रहे तो मेला सफल रहेगा और शिवभक्त अच्छी संख्या में पहुंचेंगे। मेला को लेकर तीर्थ नगरी में उत्साह है। कारोबारियों ने पूरी तैयारियां कर लीं हैं।
- अतुल अग्रवाल कारोबारी

कांवड़ मेला की धूम शुरू होने लगी है। कांवड़ की साज सज्जा और कंठी माला आदि का सामान बाजारों में सज चुका है। कांवड़ियों की संख्या बढ़ने का इंतजार हो रहा है। कांवड़ मेला को लेकर लगातार कारोबारी इस कारोबार से जुड़ रहे हैं।
- सीताराम अग्रवाल कंठीमाला कारोबारी

दो से लेकर इक्यावन सौ गंगाजली तक की कांवड़े हो रहीं तैयार
तीर्थनगरी में कांवड़ बनाने की तैयारियां तेजी से चल रहीं हैं। दिन रात कारीगर कांवड़ तैयार करने में जुटे हैं। दो गंगाजली से लेकर इक्यावन सौ गंगाजली तक की कांवड़े भी तैयार की जा रहीं हैं। सात, आठ कांवड़ियों की टोलियां इक्कीस सौ से इक्यावन सौ तक की कांवड़े भी भरते हैं। यह कांवड़े विशेष ऑर्डर पर तैयार की जातीं हैं और एक कांवड़ को उठाने के लिए सात से आठ शिवभक्तों का समूह रहता है। कावड़ बनाने वाले कारीगर सतीश चंद्र और डालचंद्र ने बताया कि कांवड़ मेले के लिए पहले से ही कावड़ें तैयार करके रखी गईं है, लेकिन इनके निर्माण का कार्य निरंतर जारी है। कांवड़ो का मूल्य 150 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक का है।
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