बाबा भीमसेन के मंदिर नदरई पर लगने वाले मेले में मंगलवार को भक्तों की भीड़ उमड़ी। इस दौरान छोटे शिशुओं की जात कराई गई। वहीं काली के अखाड़ों के प्रदर्शन ने भी लोगों को रोमांचित किया। महिलाओं, बच्चों ने मेले का लुफ्त उठाया।
भीमसेन मंदिर पर बच्चों को जात कराने एवं और मेले के आयोजन की बहुत पुरानी पंरपरा है। मेला प्रतिवर्ष होली के बाद के पहले मंगल को होता है। मेले में भोर से भी पूजा, अर्चना एवं जात के लिए भक्तों की भीड़ आनी शुरू हो गई थी। पूजा-अर्चना के साथ लोगों ने खेल खिलौने, चरख, झूले का मजा लिया। खान-पान की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ लगी रही। मंदिर के पास ही काली के अखाड़े प्रदर्शन कर रहे थे। ढोल ताशों की धुन पर कलाकार का प्रदर्शन देख लोग रोमांचित रहे। वहीं मेले में आए भक्तों के लिए गौरी शंकर तिवारी और रीता तिवारी ने व्यवस्थाएं की थी। बताया कि मंदिर का कुछ समय पहले जीर्णोद्धार कराया गया है।
चौरासीमन का घंटा करता है आकर्षित
भीमसेन के मंदिर का चौरासीमन का घंटा प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। करीब 250 वर्ष पूर्व बाबा भीमसेन ने अंग्रेजी फौज के साथ युद्ध करते हुए वर्मा से जीता था। अंग्रेजी फौज के अधिकारियों ने बाबा को जीत के इनाम के तौर पर जीता हुआ घंटा और चौबीस गांव की जिम्मेदारी दी थी। बाबा ने मंदिर में इस घंटे की स्थापना कर दी। उसी समय से बच्चों को बलशाली बनाने के लिए यहां जात कराई जाती है।