अब तो हर मौसम में मलेरिया के मच्छर डंक मारते रहते हैं। गर्मी आते ही बीमारों की संख्या बढ़ने लगती है। पर, जिले में मलेरिया से निपटने के इंतजाम काफी खराब हैं। मलेरिया विभाग सिर्फ अधिकारी के भरोसे चल रहा है। कई महत्वपूर्ण पद आज तक सृजित नहीं हो सके हैं। जो सृजित भी हैं, वे भरे नहीं गए। लैब भी नहीं है। इससे पीड़ितों को जांच, इलाज के लिए भटकना पड़ता है।
तटीय इलाका होने के कारण कासगंज जिला मलेरिया के मामले में बेहद संवेदनशील है। यहां हर साल ही मलेरिया चुनौती सामने आती है। प्रतिवर्ष कई लोगों को जान भी गंवानी पड़ती है। फिर भी इससे निपटने में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इस वर्ष ही देखें तो कुछ दिन पहले ही पिंटू पुत्र सुंदर निवासी ताखरू को मलेरिया से पीड़ित होने पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालत बिगड़ने पर उसे अलीगढ़ रेफर किया गया। इसी तरह अशोक नगर की रूबी मलेरिया से बीमार पड़ने पर भर्ती कराई गई। आए दिन इसी तरह पीड़ित सामने आते रहते हैं। पर, जनपद सृजित होने के 10 वर्ष बाद भी मलेरिया विभाग के नाम पर यहां सिर्फ खाना पूर्ति हो रही है। शासन से मात्र जिला मलेरिया अधिकारी की ही नियुक्ति की गई। जांच के लिए अलग से कोई प्रयोगशाला भी नहीं है। सीनियर लैव टेक्नीशयन की तैनाती नहीं है। विभाग के पास अपना भवन भी नहीं हैं। सीएमओ कार्यालय में ही एक कमरे में मलेरिया विभाग चल रहा है। जबकि यहां एसीएमओ, वेक्टर बोन, असिस्टेंट मलेरिया अधिकारी के एक-एक पद, मलेरिया निरीक्षक के दो पद, स्प्रे मैन के 41 पद होने चाहिए, लेकिन इनमे से कोई भी पद सृजित नहीं है।
पालिका भी नहीं दे रही ध्यान
मलेरिया की रोकथाम को पालिका भी ध्यान नहीं दे रही। इस समय मच्छर का प्रकोप काफी बढ़ा हुआ है, लेकिन दवा का छिड़काव नहीं कराया है। जलभराव, गंदगी और नालियों में भरे कचरे के कारण मलेरिया अपने पांव पसार रहा है।
बुखार से पीड़ित होने वाले मरीजों की जांच में मलेरिया की पुष्टि होने पर विभाग समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराता है
डॉ रंगजी दुबे, सीएमओ कासगंज