एटा। कर्जा जमा करने के लिए बैंक कर्मचारियों की ओर से किसान पर दबाव बनाया गया तो उसने नहर में कूद कर आत्महत्या कर ली। किसान को पांच दिन पूर्व गांव में मुनादी के बाद बैंक कर्मचारियों ने पकड़ने की कोशिश की थी, वह तभी से लापता था और शुक्रवार की सुबह नहर से शव बरामद हुआ है। परिजनों ने पुलिस को सूचना दे दी है।
थाना निधौलीकलां क्षेत्र के गांव दूल्हा निवासी सुरेश चंद्र (45) पुत्र केदारी लाल का शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे हजारा नहर अरथरा पुल के पास से शव बरामद हुआ है। मृतक के चचेरे भाई जगदीश सिंह ने बताया कि सुरेश चंद्र ने भूमि विकास बैंक से ऋण लिया था, छह माह पूर्व बेटी की शादी करने और लॉकडाउन लगने की वजह से बाहर मजदूरी करने नहीं जा पाया। इसके चलते कर्ज चुकता नहीं कर पाया था। कर्जा जमा कराने के लिए भूमि विकास बैंक के अधिकारी काफी दिन से दबाव बना रहे थे।
आरोप है कि 30 नवंबर को बैंक कर्मचारियों की एक गाड़ी गांव में आई और मुनादी कराई गई। भाई को कर्मचारियों की ओर से पकड़ने का प्रयास किया गया। बैंक का कर्ज जमा करने में असमर्थ भाई घर से लापता हो गए थे, इनकी तलाश की लेकिन कोई सुराग नहीं मिल सका। शुक्रवार की सुबह अरथरा नहर पुल के पास एक शव देखा, इसकी जानकारी होने पर जाकर देखा तो सुरेश चंद्र के रूप में पहचान की गई। मामले की जानकारी पुलिस को देखकर शव बरामद करा दिया और पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। परिजनों ने अभी तक इस मामले में पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी है।
अधिकारी का कहना
किसान पर कर्ज जमा करने के लिए दबाव नहीं बनाया गया, किसान से तगादा किया गया था। वर्ष 2015 में 90 हजार रुपये ऋण लिया था जो वर्तमान में एक लाख 93 हजार हो चुका है। परिजनों की ओर से दबाव बनाकर कर्ज जमा कराने की बात गलत है।
राकेश बाबू, प्रबंधक, भूमि विकास बैंक, जलेसर