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जिले में बीस गोशालाएं फिर भी खुले में घूम रहे गोवंश

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सड़क पर बैठा गोवंश। संवाद - फोटो : ETAH
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एटा। जिले में बीस स्थायी और अस्थायी गोशालाएं हैं। इसमें 2811 निराश्रित गोवंश रह रहे हैं। इसके अलावा अभी भी अधिकतर गोवंश सड़कों पर खुले में घूम रहे हैं। इनमें जियो टैगिंग वाले गोवंश भी शामिल हैं। उधर, गोवंशों के खुले में घूमने के कारण राहगीर इनसे टकराकर घायल हो रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
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योगी सरकार ने जिले में गोवंशों के लिए तीन कान्हा आश्रय स्थल, एक वृहद गोशाला सहित स्थायी व अस्थायी बीस गोशालाएं खोली हैं। इसमें जिले के 2811 निराश्रित गोवंश को रखा गया है। वहीं इसके अलावा अधिकतर गोवंश जिले की जीटी रोड सहित अन्य मार्गों पर विचरण कर रहे हैं।
इन गोवंश से आए दिन कोई न कोई राहगीर टकराकर घायल हो रहा है। इसको लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन से शिकायत भी की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उधर, जिले में जियो टैगिंग वाले भी गोवंश सड़कों पर विचरण करते देखे जा सकते हैं। वहीं पालिका द्वारा अभी तक कान्हा आश्रय स्थल भी नहीं बनवाया गया है।
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बिजली कनेक्शन में उलझी वृहद गोशाला
जलेसर देहात में बनवाई गई वृहद गोशाला बिजली कनेक्शन में उलझ गई है, जबकि सवा करोड़ रुपये की लागत से गोशाला का निर्माण कराया गया है। यहां बिजली का कनेक्शन नहीं होने के कारण पशुओं को नहीं रखा जा रहा है। वहीं अवागढ़ में बन रहा कान्हा आश्रय स्थल विवाद की भूमि पर है। इससे चलते वहां भी रुकावट आ गई है।
507 पशु दिए सुपुर्दगी में
किसानों की आय बढ़ सके, इसके लिए सरकार द्वारा एक योजना चलाई गई। इसके तहत किसानों को गोशाला से गोवंशों को अपनी सुपुर्दगी में लेना होगा। वहीं सरकार द्वारा 900 रुपये प्रतिमाह उसे पशु को चारा खिलाने पिलाने को दिए जाएंगे। इसके तहत जिले में 298 किसानों को 507 पशु सुपुर्दगी में दिए गए।
अवागढ़ में कान्हा उपवन के लिए दूसरी भूमि देखी जा रही है। वहीं, जलेसर की वृहद गोशाला में कनेक्शन के लिए अधिकारियों से कहा गया है। पास से स्कूल से गोशाला में कनेक्शन लेने की बात चल रही है। सड़क पर जो पशु विचरण कर रहे हैं, उन्हें जल्द ही पकड़वाकर गोशालाओं में किया जाएगा।
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-डॉ. एसपी सिंह सोलंकी, सीवीओ
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