मरीज के परिजन दूसरी एंबुलेंस बुलाने के लिए कॉल करते रहे, लेकिन दूसरी एंबुलेंस नहीं मिली। एंबुलेंस में स्टेपनी भी नहीं थी बदलने के लिए। सरकार करोड़ों रुपये स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च कर रही है, इसके बाद भी मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। एंबुलेंस की खस्ता हालत का जिम्मेदार कौन।
यह सब बातें लिखकर पोस्ट की गई है। एंबुलेंस के जिला प्रभारी अर्जुन त्यागी ने बताया एंबुलेंस का पहिया पंक्चर हो गया था। उसे कर्मियों ने तत्काल बदला। एंबुलेंस में स्टेपनी उपलब्ध थी। बाद में मरीज को भर्ती कराया गया। सुबह 4:30 बजे मरीज घर गया। इस दौरान भी एंबुलेंस उसे छोड़कर आई। शिकायत आने पर मामले की जांच कर ली गई है।