एटा। पुलिस की जांच और कार्रवाई में सांठ-गांठ का खेल खूब चलता है। सरकारी नाली तोड़ने के मामले में प्रधान के सबूताें को दरकिनार कर आरोपी के खिलाफ विवेचक दरोगा ने एफआर (अंतिम रिपोर्ट) लगा दी। यह रिपोर्ट आरोपी के पास पहुंच गई और उसने अपने फेसबुक स्टेटस पर लगाकर एक तरह से सिस्टम का मजाक उड़ा दिया। शिकायत पर सीओ ने एफआर को वापस कर दिया है। साथ ही फेसबुक स्टेटस के मामले में विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है।
मामला ब्लॉक शीतलपुर और कोतवाली देहात के गांव बहादुरगढ़ का है। 16 जून को ग्राम प्रधान सर्वेंद्र सिंह यादव की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज की गई। इसमें बताया गया कि उनके द्वारा बनाई गई सरकारी नाली को 11 जून को सुखेंद्र के कहने पर त्रिवेंद्र ने अपने ट्रैक्टर से तोड़ दिया। जिससे सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ। प्रधान ने शिकायत बीडीओ से की और बीडीओ ने कोतवाली देहात में पत्र भेजा। इस पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जावड़ा चौकी प्रभारी एसआई मुकुल कुमार को विवेचना सौंपी।
प्रधान ने बताया कि उन्होंने घटना के फोटो, वीडियो आदि साक्ष्य विवेचक को उपलब्ध कराए, लेकिन उन्होंने इन साक्ष्यों को जांच में शामिल न कर एफआर लगा दी। इसमें लिखा कि मुकदमे में नामित सुखेंद्र व त्रिवेंद्र द्वारा घटना किए जाने के कोई भी साक्ष्य नहीं मिले हैं। साक्ष्य के अभाव में मुकदमे की विवेचना अंतिम रिपोर्ट के जरिए समाप्त की गई। सोशल मीडिया पर आरोपी ने अपने फेसबुक स्टेटस पर एफआर की कॉपी एक चुनौतीपूर्ण गाने के साथ लगाकर वायरल की।
इसकी शिकायत प्रधान ने एसएसपी से की तो जांच सीओ सिटी को सौंपी गई। सीओ ने मामले की जांच में कई खामियां पाईं। प्रभारी कोतवाली देहात को एफआर वापस कर इस संबंध में निर्देशित किया है। सीओ सिटी विक्रांत द्विवेदी ने बताया कि एफआर की प्रति फेसबुक स्टेटस पर लगाए जाने के संबंध में विभागीय कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है।