एटा। करीब 15 साल से चल रहे जानलेवा हमले के मुकदमे में आरोप साबित नहीं हो सके। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट नरेंद्र पाल राणा ने मामले के तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है।
थाना जसरथपुर में गांव गनपतिपुर बड़ापुर निवास रतनेश सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि 3 जुलाई 2010 को वह सुबह के समय ताऊ किशनपाल सिंह के मकान के बाहर बैठकर चाय पी रहा था। तभी गांव के उदयपाल सिंह, उदयवीर सिंह, अजयपाल सिंह, किशनवीर उर्फ टिर्री हाथों में असलहे लेकर आए। कहने लगे कि तुम लोगों ने हमारी दीवार बनने से क्यों रोकी, आज मजा चखा देंगे। गालियां देते हुए जान से मारने की नीयत से फायर किए। इसमें वहां मौजूद पूरन सिंह, राघवेंद्र सिंह, रमीला और शशि के चोटें आईं।
पुलिस ने विवेचना कर चारों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में पेश कर दिए। मुकदमे के विचारण के दौरान आरोपी किशनवीर उर्फ टिर्री की मृत्यु हो गई। गवाही के दौरान घायल पूरन सिंह, राघवेंद्र और रमीला ही अपने बयानों से मुकर गईं। ऐसे में अदालत ने उन्हें पक्षद्रोही घोषित कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 12 गवाह पेश किए गए लेकिन ये आरोपों को साबित नहीं करा सके। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।