फसल नष्ट होने पर गमगीन किसान
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किसानों के कर्जमाफी का भाजपा द्वारा किया गया वादा पूरा करने की कवायद शुरू हो गई है। स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी ने 31 दिसंबर 2016 तक फसली लोन लेने वाले लघु एवं सीमात किसानों का ब्योरा बैंकों से मांगा है। हालांकि जिले के लघु एवं सीमांत किसानों का कितना ऋण माफ होगा, इसकी स्थित अभी साफ नहीं है।
बीते कई सालों से ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश और सूखे की मार से किसानों की फसलें बर्बाद होती रही हैं। इस बार मंदी के कारण आलू किसानों को भी घाटा उठाना पड़ा। लागत निकलनी मुश्किल है। ऐसे में वे कर्ज चुकता करने को लेकर परेशान हैं। किसानाें की समस्या पर विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र ने सरकार बनने पर पहली कैबिनेट मीटिंग में किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था। अब सत्तासनी होने के बाद भाजपा के इस चुनावी वादे को साकार करने की कवायद भी शुरू हो गई है। स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी ने जिले के कर्जदार लघु एवं सीमांत किसानों का ब्योरा तलब किया है। हालांकि जिले में आदेश की कॉपी लेट आने के कारण अभी सूची बनाने का काम शुुरू नहीं हुआ है। लीड बैंक मैनेजर एलसी पॉल ने कहा कि जल्द ही सभी बैंक प्रबंधकों को आदेश जारी कर कर्जदार लघु एवं सीमांत किसानों का विवरण तैयार कराया जाएगा। बताया कि वर्ष 2016-17 में जिले के 33,703 किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से करीब 337 करोड़ रुपये और 74,803 लघु एवं सीमांत किसानों ने 11 करोड़ रुपये से अधिक का फसली ऋण लिया है।
ये है लघु और सीमांत किसानों की पात्रता
किसानाें को तीन श्रेणियों में बाटा गया है। लघु किसान वे हैं, जिनके पास पांच एकड़ कृषि भूमि है। जबकि सीमांत किसान वे हैं जिनके पास 2.5 एकड़ कृषि भूमि है। जबकि पांच एकड़ से अधिक भूमि वाले किसान सामान्य कृषक की श्रेणी में आते हैं। जिले में लघु किसानों की संख्या 39,700, सीमांत किसानों की संख्या 1,59,943 है।