एटा। शहर की आधी आबादी पेयजल आपूर्ति से वंचित है। दावों के बाद भी पालिका पूरे शहर में जलापूर्ति नहीं दे पा रही। कई मोहल्ले में तो पानी नहीं पहुंच रहा। वहीं जर्जर-पुरानी पाइप लाइनें आपूर्ति बाधित कर रही हैं। इनमें बढ़ रहा लीकेज पानी को दूषित कर रहा है।
शहर की पेयजल अव्यवस्थाओं के चलते जलापूर्ति कहना बेमानी होगी। दशकों बाद भी शहर वासी जलापूर्ति से संतृप्त नहीं हो पा रहे। वे निजी साधनों से जबरन आपूर्ति लेकर काम चला रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर के अधिकांश मोहल्लों में घरों की आपूर्ति अनुचित तरीके से ली जा रही है। लोग टिल्लू आदि लगाकर पाइपों से पानी खींच रहे हैं। इसके चलते अन्य घरों में पानी नहीं पहुंचता। लोगों की मानें तो टिल्लू के प्रेशर के चलते नालियों से गुजर रही लाइनों में लीकेज के चलते नालियों का पानी घरों तक पहुंच रहा है। शहर के विजयनगर, घंटाघर, पटियाली गेट, सब्जीमंडी, जैन गली, मैनगंज, सुभाष चौक, बांस मंडी, पटियाली गेट आदि के लोगों की ऐसी ही शिकायतें हैं। नवसृजित मोहल्ले कालोनियां ही नहीं पुरानी बस्तियां भी पानी की किल्लत से जूझ रही हैं। अव्यवस्थाओं से परेशान आधी आबादी निजी साधनों पर आश्रित हो गई है। घर घर में लगे समर जेट इसके प्रमाण हैं।
पालिका के 11 ओवरहेड टैंक में तीन तकनीकी खराबी से जूझ रहे हैं। अलीगंज रोड स्थित टैंक जहां ट्रायल पर है। वहीं मेहता पार्क और वनगांव स्थित ओवरहेड टैंक लीकेज से ग्रस्त है। वहीं शहर के आठ नलकूप कंडम हालत में हैं।
पालिका प्रशासन के अनुसार शहर की आबादी चार लाख से अधिक है। जलकल मानकों के अनुसार इस आबादी के लिए प्रतिदिन तीन करोड़ लीटर से अधिक पानी की आवश्यकता है। जबकि इतनी क्षमता तो पालिका के ओवरहैड टैंकों तक की नहीं है। ऐसे में प्रतिदिन डेढ़ करोड़ लीटर की भी जलापूर्ति नहीं हो पा रही। वहीं, ध्वस्त व जर्जर पाइप लाइन के चलते लाखों लीटर पानी लीकेज के चलते बर्बाद हो रहा है।
दशक से जलकल अभियंता नहीं
स्टाफ की कमी से जूझ रही पालिका के पास अधिकारी तो दूर कर्मचारी तक नहीं हैं। ऐसे में यहां का काम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सहारे चलाया जा रहा है। अति महत्वपूर्ण और संवेदनशील जलकल विभाग के पास एक दशक से जलकल अभियंता नहीं है। ऐसे में यहां अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। जलकल कार्यालय का उद्घाटन 27 मई 1957 में स्वायत शासन विभाग के मंत्री विचित्र नारायण शर्मा ने किया था।
15 प्रतिशत आबादी आरओ की शरण में
दूषित जलापूर्ति बीमारियां परोस रही है। शहर की 10 से 15 प्रतिशत आबादी आरओ की शरण में हैं। संपन्न एवं स्तरीय लोगों के यहां आरओ प्लांट (रिवर्स ओसमिस) लगे हैं। वहीं, अन्य जागरूक व्यावसायिक प्लांट से पीने का पानी खरीद रहे हैं। शहर में संचालित दर्जनों आरओ संचालक शहर वासियों को प्रतिदिन लाखों लीटर पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश सक्सेना का कहना है कि बच्चों की अधिकांश बीमारियां दूषित जल से फैल रही हैं।
जिला खाद्य और अभिहित विभाग के अनुसार जनपद में आठ आरओ प्लांट स्वीकृत हैं। जबकि सच्चाई इससे इतर है। शहर में दर्जन भर से अधिक प्लांट संचालित हैं। जो लोगों को पानी की आपूर्ति कर रहे हैं।
पालिका की बदहाल पेयजल आपूर्ति से लोगों का विश्वास उठ रहा है। कम प्रेशर के चलते दूसरी मंजिल तो दूर नीचे की मंजिल में भी पानी नहीं आ रहा। अधिकांश लोग टिल्लू के सहारे जलापूर्ति ले रहे हैं।
- इलियास अहमद, किदवई नगर, एटा
शहर की आबादी-चार लाख
प्रतिदिन आवश्यक पानी-तीन करोड़ लीटर
शहर में बने ओवरहेड टेंकों की क्षमता-दो करोड़ लीटर
नियमित हो रही आपूर्ति-डेढ़ करोड़ लीटर
लीकेज के चलते दस से पंद्रह लाख लीटर पानी सड़कों पर ही बह जाता है।
हैंडपंप उगल रहा दूषित पानी
घिलौआ में पालिका परिषद का हैंडपंप दूषित पानी उगल रहा है। परेशान वाशिंदों ने इसकी शिकायत पालिका प्रशासन से की है। इतना ही नहीं इन लोगों ने दूषित पानी भरकर अधिकारियों को पेश करने का भी निर्णय लिया है। वहीं पानी के लिए आए दिन लोगों में झगड़े होते रहते हैं और सिर तक फूट जाते हैं।