अवागढ़ (एटा)। सर्पदंश से एक ही परिवार में दो किशोरियों की मौत से सदमे में डूबे परिवार और गांव को एक सपने के अंधविश्वास ने दहशत में ला दिया। परिवार के तीन सदस्यों को सपने में नाग की मौत का बदला लेने की बात कहती नागिन दिखाई दी। सुबह एक खेत में काला सर्प किसी ग्रामीण को दिख गया। फिर तो सपने को सच मान ग्रामीण नागिन को तलाशने निकल पड़े। सूचना मिलने पर आस पास के गांवों के सपेरे भी पहुंच गए। दोनों किशोरियों की कब्र पर दिन भर बायगीर नागिन को पकड़ने के लिए बीन बजाते रहे तो ग्रामी थालियां बजाते रहे लेकिन नागिन नहीं आई।
बता दें कि अवागढ़ के गांव नगला सीर निवासी डिप्टी सिंह की पुत्री पूनम (15) व नातिन पूजा (13) पुत्री खमान सिंह शनिवार की रात रक्षाबंधन पर्व के चलते मेहंदी लगाकर जमीन पर सोई थीं, तभी एक काले नाग ने दोनों को डस लिया। परिवारीजन दोनों को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां उपचार के दौरान पूनम की मौत हो गई थी, लेकिन पूजा को भी कोई लाभ नहीं हुआ तो परिवारीजन उसे बायगीरों के पास ले गए, उसकी भी जान नहीं बची और उसने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों ने बाद में घर में छिपे नाग को मार दिया था। ग्रामीणों ने बताया कि पूजा की मां सरला व परिवार के ही अन्य सदस्य दिवारी व चिंटू को रविवार की रात सपने में नागिन दिखी। पूजा की मां सरला ने बताया सपने में नागिन कह रही थी ‘तुमने मेरे नाग को मार डाला है, इसलिए अभी मैं तुम्हारे घर में दो और लोगों को डसूंगी’। उन्होंने बताया कि पूजा ने भी सपने में जिंदा होने की बात कही। सुबह लोग सपने पर चर्चा कर रहे थें, कुछ लोगों का कहना था कि यह वहम है, सपने कभी सच होते है, इसी बीच किसी ने एक काले नाग को घर के सामने खेतों में देख लिया। इसके बाद तो पूरे गांव में दहशत फैल गई। अंधविश्वास के मारे लोगों ने उसे सपने में दिखी नागिन मानकर मारने और पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह हाथ नहीं आया। सैकड़ों लोगों को हुजूम गांव की ओर दौड़ पड़ा। नागिन को पकड़ने के लिए नगला छइया, वीरनगर, रूद्रपुर, भूरगड्ढा आदि गांव के बायगीरों व फीरोजाबाद के कोटला नगला नेक से सपेरों को बुलाया गया। समाचार लिखे जाने तक बायगीर नागिन को बुलाने के लिए थालियां बजा रहे थे। जबकि ये सर्वविदित तथ्य है कि सर्प प्रजाति के जीव सुन ही नहीं पाते, फिर भी देर शाम तक नागिन पकड़ने के नाम पर तमाशा जारी था और लोग थालियां बजा रहे थें। घटना के बाद सोमवार को किसी के घर में चूल्हे नहीं जले।
भारत में विभिन्न प्रजाति के जहरीले सांप पाए जाते हैं। इनमें लोगों द्वारा नाजा नाम से जाना जाने वाला नाग सबसे जहरीला होता है। बरसात में सांप के डसने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि यह चूहे आदि के बिलों में छिपे होते हैं। उमस व बरसात में इनमें पानी भर जाने से बाहर निकल आते हैं और लोगों को अपना शिकार बना लेते हैं। वहीं किसी को सांप डसता है तो डसने वाली जगह पर यदि गहरे दो निशान पड़ें तो समझो किसी जहरीले सांप ने डसा है। वहीं ऐसी कोई वैज्ञानिक मान्यता नहीं है कि थाली बजाने से नाग या नागिन सामने आ जाएगी। यह केवल गांव के लोगों का भ्रम है।
- सीपी कश्यप, जीव विज्ञान प्रभारी, अविनाशी सहाय आर्य इंटर कालेज, एटा