एटा। कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव नगला केवल में पांच दिन पहले हुए जातीय संघर्ष के मामले में जिला प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न करने से मामले ने तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग लखनऊ तक पहुंची दलित उत्पीड़न की शिकायत पर शुक्रवार को आयोग के निदेशक डा. दिवाकर वसाक और सहायक निदेशक तरुण खन्ना गांव पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी कर पीड़ितों को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। साथ ही पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दलित पक्ष के लोगों पर लगी डकैती, तोड़फोड़ व जाम लगाने की रिपोर्ट तत्काल वापस लेने की बात कही। टीम लगभग एक घंटे तक गांव में रुकी।
बताते चलें कि गत 18 नवंबर को कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव नगला केवल निवासी प्रेमपाल जाटव के घर से किसी बालक ने शनिवार की शाम को पड़ोसी नरेंद्र यादव सेवानिवृत्त फौजी के घर में गोबर फेंक दिया था। जिसके चलते दोनों पक्षों में काफी कहासुनी हुई थी बाद में मामला जातीय संघर्ष में बदल गया था। इस मामले में दोनों ही पक्षों के अलावा पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इधर, दलित पक्ष ने उनका उत्पीड़न करने की शिकायत एससीएसटी आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनियां से की थी। शिकायत को लेकर गंभीर हुए अध्यक्ष के निर्देश पर शुक्रवार को निदेशक एवं सहायक निदेशक एसडीएम सदर रामशंकर के साथ घटनास्थल नगला केवल में पहुंचे। उन्होंने पीड़ित दलित पक्ष की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराने वाले दुर्गेश तथा एक अन्य महिला के साथ अकेले में पूरी घटना की जानकारी की। साथ ही आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। नगला केवल पहुंचे निदेशक डा. दिवाकर वसाक ने बताया कि मामले की पूरी जांच कर ली गई है। शनिवार या रविवार को जांच रिपोर्ट अध्यक्ष को सौंप देंगे।