एटा। सरकारी गेहूं की खरीद के लिए जिले को 76 हजार एमटी का लक्ष्य मिला था। 107 दिनों तक 84 केंद्र संचालित किए गए, लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष जिले में 65325 क्विंटल ही गेहूं की खरीद हो पाई। जनपद लक्ष्य से इस बार भी कोसों दूर रह गया।
एक मार्च को जिले में 84 क्रय केंद्र गेहूं खरीद के लिए खोल दिए गए थे। केंद्र प्रभारियों को निर्देश थे कि किसानों से संपर्क कर गेहूं की खरीद करें। 100 क्विंटल से अधिक गेहूं किसी किसान के पास है तो उसके गांव में कांटा लगा दें। केंद्र प्रभारियाें ने किसानों से संपर्क किया। तब जाकर अप्रैल माह में क्रय केंद्रों पर गेहूं पहुंचना शुरू हुआ। यहां किसानों से 2275 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा था। इसके अलावा 20 रुपये लेबर चार्ज भी दिया जा रहा था।
अप्रैल में मंडी में गेहूं का भाव लगभग यही रहा। मई में मंडी में निजी खरीद एजेंसियां पहुंचीं तो गेहूं के भाव में उछाल आ गया। ऐसे में सरकारी केंद्रों पर गेहूं पहुंचना बंद हो गया। किसानों को इनसे 2400 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से रुपये मिलने मिले। ऐसे में किसान उन पर ही गेहूं की बिक्री करने लगे। आलम यह रहा कि सरकारी खरीद 107 दिन में 65325 क्विंटल की हो पाई।
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1684 किसानों से खरीदा गया गेहूं
क्रय केंद्रों पर 65325 क्विंटल गेहूं 1684 किसानों से खरीदा गया। केंद्रों पर गेहूं न पहुंचने का कारण रजिस्ट्रेशन का रहा। किसानों का कहना था क्रय केंद्र पर गेहूं लेकर जाओ। उससे पहले पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराओ। गेहूं का भुगतान भी 72 घंटे में नहीं हो रहा था। 4 से 5 दिन भुगतान में लग रहे थे। जबकि आढ़त पर तत्काल रुपये मिल रहे थे। नहीं तो दूसरे दिन तो मिल ही जाते थे। ऐसे में आढ़त पर बेचना सही लगा। बीते वर्ष भी गेहूं खरीद में जिला लक्ष्य के सापेक्ष खरीद नहीं कर पाया था। बीते वर्ष 800 क्विटल ही गेहूं क्रय केंद्रों पर पहुंचा था।
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आंकड़ों पर एक नजर
गेहूं खरीद का मिला लक्ष्य- 76 हजार एमटी
लक्ष्य के सापेक्ष हुई खरीद- 65325 क्विंटल
खरीद के लिए बनाए गए क्रय केंद्रों की संख्या- 84
केंद्रों पर चली गेहूं की खरीद- 107 दिन
केंद्रों पर गेहूं लेकर पहुंचे किसानों की संख्या- 1684
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जिले को गेहूं खरीद का 76 हजार एमटी का लक्ष्य मिला था। इसके सापेक्ष 65325 क्विंटल ही गेहूं की खरीद हो पाई। आढ़तों पर क्रय केंद्रों से अधिक मूल्य पर गेहूं खरीदा जा रहा था। ऐसे में किसान वहां गेहूं को ले गए। नंदकिशोर, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी