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कर्ज के लिए भटक रहे 80000 किसान

Wed, 24 May 2017 12:01 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला एटा
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किसान (डमी फोटो)
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लघु और सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक फसली ऋण माफ करने की घोषणा तो कर दी गई, लेकिन अब तक ऋण माफ नहीं किया गया है। बैंक पुराना ऋण माफ न होने के कारण किसानों को नया ऋण नहीं दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में जिले के करीब 80000 किसान दलहन, बाजरा, मक्का, मूंगफली आदि की बोवाई की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।
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जिले में सवा लाख से अधिक लघु और सीमांत किसान हैं। इन पर बैंकों का करीब 356 करोड़ रुपये फसली ऋण बकाया है। इनमें केसीसी के माध्यम से 33703, लघु और सीमांत 39760 किसानों सहित करीब 80000 किसान ऐसे हैं जो कर्ज माफी के दायरे में आते हैं।

बैंकों ने कर्जदार किसानों की सूची बनाकर राज्य बैंकर्स कमेटी को भेज दी है, लेकिन प्रदेश सरकार ने अभी तक किसानों का फसली ऋण माफ नहीं किया है। ऐसे में फसली ऋण लेकर दलहन, बाजरा, मक्का, तिल, मूंगफली की बुवाई करने की तैयारी में लगे किसानों की मुश्किल बढ़ गई है। इन दिनों फसली ऋण के लिए किसान बैंक शाखाओं के चक्कर लगा रहे हैं।
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सरकार को कर्जदार किसानों की सूची भेज दी गई, लेकिन ऋण माफी को लेकर कोई आदेश नहीं मिला है। ऐसे में नया फसली ऋण नहीं दिया सकता है। बैंक का 3000 किसानों पर करीब 18 करोड़ रुपये फसली ऋण बकाया है।
- संजीव कुमार, प्रबंधक, एसबीआई कृषि विकास शाखा अरुणा नगर एटा

प्रदेश सरकार से बैंकों को अभी तक कर्ज माफी की रकम नहीं मिली है। बैंकों में पुराने कर्ज पर नया कर्ज देने का कोई नियम नहीं है। पुराना हिसाब चुकता होने के बाद ही नया ऋण जारी करने का नियम है।
- एलसी पॉल, केनरा लीड बैंक मैनेजर एटा

किसानों की सुनिए
मैंने बैंक से 40000 रुपये कर्ज लिया था। सरकार ने कर्ज माफ करने की घोषणा की तो लोन जमा नहीं किया। पुराना लोन खत्म नहीं होने से बैंक नया लोन नहीं दे रहे। मक्का और धान बोने के लिए लागत के पैसे नहीं हैं।
- मुकेश, लालपुर देहामाफी मारहरा
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बैंक से एक लाख रुपये लोन लिया था। सरकार ने कर्ज माफ करने की घोषणा की तो खुशी हुई,  लेकिन अभी तक कर्ज माफ नहीं होने के कारण बैंक नया लोन नहीं दे रहे। धान, बाजरा, मक्का की फसल बुवाई के लिए लागत नहीं है। कर्ज जल्द माफ होना चाहिए।
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-चरन सिंह, खकरई मारहरा
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