एटा। जिला मुख्यालय में करीब आठ हजार ई-रिक्शे संचालित हो रहे हैं। इनमें से महज एक हजार का ही पंजीकरण है। अन्य सभी बिना पंजीकरण के दौड़ रहे हैं। तमाम रिक्शों के हैंडल थामे नाबालिग चालक यात्रियों की जान खतरे में डाल रहे हैं। शुक्रवार को जीटी रोड पर एक ई-रिक्शा पलटने से सवारी की मौत हो गई। इसका चालक नाबालिग था।ई-रिक्शों की बाढ़ से हर मार्ग पर जाम की समस्या बढ़ गई है। बिना लाइसेंस ई- रिक्शों के नाबालिग चालक सड़कों पर यमदूत बनकर वाहनों को दौड़ाते दिखाई देते हैं। उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त ने 9 जुलाई 2015 को एक पत्र जारी कर सभी विभागीय अधिकारियों से कहा था कि ई-रिक्शा का परिवहन विभाग में अन्य वाहनों की तरह पंजीकरण कराया जाए। इसके साथ ही इनके चालकों के लिए अलग से वाहन लाइसेंस भी जारी होना चाहिए। इसके लिए प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र भी लगना है। इसके अलावा पंजीकरण का शुल्क निर्धारित सवारी क्षमता के अनुसार लगाया जाए। जिले के जिम्मेदार अधिकारी नींद में सोए हुए हैं। इसकी वजह से घटना-दुर्घटना के बाद ई-रिक्शा का पता करना भी मुश्किल हो जाता है।
न हुआ स्टैंड का इंतजाम, न चल सका रूट प्लान
ई-रिक्शा की वजह से अक्सर जाम की समस्या सामने आती है। यातायात पुलिस व नगर पालिका की ओर से कई बार निदान का प्रयास किया गया। मगर सफलता नहीं मिली। ई-रिक्शा के लिए स्टैंड बनाने की बात हुई तो विवाद हो गया। नंबर डालकर रूट प्लान तय किया गया, उसको लागू भी किया गया। जो कि कुछ दिनों तक ही चल सका, जिसके चलते समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
लगभग 1 हजार ई-रिक्शाें का पंजीकरण परिवहन विभाग में है। अब कंपनी ही पंजीकरण कराकर रिक्शा बेच रही है। नाबालिग ई-रिक्शा चालकों पर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। जो ई-रिक्शा पंजीकृत हैं उनका नियम उल्लंघन पर चालान भी किया जाता है। - अभिनव चौधरी, यात्री कर अधिकारी