एटा। समूह बनाकर पिता-पुत्र को पीटने के मामले में बृहस्पतिवार को विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट मनीषा ने फैसला सुनाया। 7 लोगों को दोषी ठहराते हुए परिवीक्षा पर छोड़ने का आदेश दिया।
थाना पिलुआ में मोहकम सिंह ने 15 नवंबर 2007 को रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप था कि उसका बेटा राजेश खेत पर शौच के लिए जा रहा था। रास्ते में गांव के लोगों ने घेरकर लाठी-डंडों से पीटा। लहूलुहान हालत में घर पहुंचा। इस पर आरोपियों के पास जाकर मैंने विरोध किया तो इन लोगों ने मुझे भी लाठी-डंडों से पीटकर घायल कर दिया। गांव के अन्य लोगों ने आकर बचाया।
करीब 17 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद बृहस्पतिवार को अदालत का फैसला आया। न्यायाधीश ने अपने आदेश में लिखा है कि जगदीश, रामेश्वर, वीरेंद्र, सर्वेश, जितेंद्र पुत्रगण मक्खन सिंह और जितेंद्र व अनार सिंह को दोषी पाते हुए तुरंत दंडित न कर 6 माह की परिवीक्षा पर रिहा किया जाता है। शर्त लगाई है कि इस अवधि के दौरान सादगी से रहेंगे तथा सदाचारी बनेंगे। शर्ताें का उल्लंघन करने पर दंडादेश भोगे जाने के लिए न्यायालय के समक्ष उपस्थित होंगे।