एटा। तमाम जागरुकता अभियानाें और स्वास्थ्य विभाग की कवायद के बावजूद गर्भवती महिलाएं सेहत के प्रति लापरवाही बरत रही हैं। इन्हीं लापरवाही की वजह से इस साल अब तक 636 महिलाएं हाई रिस्क गर्भधारण की श्रेणी में मिली हैं। उन्हें इस श्रेणी से बाहर निकालने के लिए उपचार दिया जा रहा है। जिले में दो माह में चार प्रसूता और दो नवजात की मौत हो चुकी है।
जिले में हर माह चार दिन प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस का आयोजन होता है। इस दौरान सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा मेडिकल कॉलेज पर गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए विशेष शिविर लगता है। आशा और एएनएम के सहयोग से महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच कराई जाती है। जिन केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं है, वहां से अनुबंधित निजी केंद्रों में भेजकर निशुल्क जांच कराई जाती है। मौजूदा वर्ष में इन केंद्रों पर 21791 महिलाएं आई हैं, जिनमें 636 महिलाएं हाई रिस्क गर्भधारण की श्रेणी में मिली हैं। इन महिलाओं में खून की मात्रा बेहद कम मिली है। उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती करके खून की मात्रा बढ़ाने के लिए आयरन-सुक्रोज चढ़ाया जा रहा है। वहीं कुछ महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत निशुल्क खून उपलब्ध कराया जा रहा है।
जच्चा-बच्चा की जान काे रहता है खतरा
मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. साधना सिंह ने बताया कि खून की कमी से प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की जान का खतरा रहता है। कई बार प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होता है। मां की ह्रदय गति भी रुक सकती है। बच्चे के कमजोर होने का खतरा रहता है। इसलिए महिलाओं को गर्भधारण के बाद ही खून की जांच करानी चाहिए और खानपान पर विशेष ध्यान रखना चाहिए।
विभाग ने बढ़ाई गर्भवती महिलाओं की जांच
जिले के 8 सीएचसी व 36 पीएचसी पर गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया जाता है। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज में भी प्रसव किए जा रहे हैं। सीएचसी व पीएचसी की बात की जाए तो पिछले दो माह में 4 प्रसूता और दो नवजात की मौत हो चुकी है। सकीट ब्लॉक में एक, शीतलपुर ब्लॉक में दो और जैथरा ब्लॉक में एक प्रसूता की मौत हुई है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं की जांच बढ़ा दी है।
26175 लक्ष्य के सापेक्ष 21791 गर्भवती महिलाओं की हुई जांच
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के मुताबिक जनवरी से मई माह के बीच 21791 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई है। जबकि विभाग को पांच माह में 26175 गर्भवतियों की जांच करने का लक्ष्य दिया गया था। विभाग को हर माह 5235 गर्भवतियों की जांच कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लक्ष्य के सापेक्ष विभाग द्वारा 4384 जांचे कम की गई हैं।
सभी सीएचसी व पीएचसी पर गर्भवतियों की जांच की जा रही है। लक्ष्य के सापेक्ष करीब 4 हजार गर्भवतियों की जांच कम हुई है। इसके लिए सभी सीएचसी व पीएचसी प्रभारियों को निर्देश दिए जाएंगे कि गर्भवतियों की जांच का दायरा बढ़ाया जाए। - डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सीएमओ
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