प्रदेश सरकार के निर्देश के बाद शासन की ओर से कराए गए सर्वे में जिले में सिर्फ तीन गोशालाएं ही मौके पर मिली हैं, जबकि 15 गोशालाओं का विभाग में पंजीकरण है। सर्वे के बाद अनुदान के लिए 12 गोशालाओं की ओर से किए गए आवेदन को निरस्त करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
कुछ वर्ष पूर्व जिले के गोशाला संचालकों ने अनुदान के लिए आवेदन किया था। इसमें बाद शासन की ओर से पशुपालन विभाग को सर्वे कराने के निर्देश दिए गए। पिछले दिनों हुए सर्वे में जिले में महज तीन गोशालाएं ही मौके पर संचालित होते मिलीं।
जबकि 12 में कुछ के नाम का बोर्ड लगा मिला और वहां कोई पशु नहीं था, कुछ का तो मौके पर बोर्ड भी नहीं मिला। विभाग ने अनुदान रोकने की कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी।
अब शासन के निर्देश पर विभाग ने नए सिरे से सर्वे कराया तो गोपाल गोशाला एटा, आर्ष गुरुकुल गोशाला एटा और गंगेश्वर गोशाला जलेसर ही संचालित मिली हैं। इन गोशालाओं में 400 से ज्यादा गायों का रखरखाव किया जा रहा है। सीवीओ डा. राजेश कुमार ने बताया कि जिले में तीन गोशालाएं संचालित हो रही हैं। जिनकी रिपोर्ट शासन को दी जा रही है।
अनुदान के लिए करते थे गड़बड़ी
अब तक गोशालाओं को मिलने वाला अनुदान सीधे शासन की ओर से जारी किया जाता था। इसमें गोशाला संचालक गड़बड़ी कर लेते थे। अब सरकार ने गोशाला में अनुदान के उपभोग की रिपोर्ट पशुपालन विभाग से मांगनी शुरू कर दी है ताकि खेल पर लगाम लग सके।