एटा। मेडिकल काॅलेज में स्थित बाल रोग विभाग में इस समय सबसे ज्यादा बच्चे डायरिया और डिहाइड्रेशन से पीड़ित आ रहे हैं। चिकित्सकों ने बताया कि डायरिया के कारण बच्चों में अत्यधिक डिहाइड्रेशन का खतरा होता है और बच्चे के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इन दिनों बारिश हो रही है ऐसे में बच्चों को सर्वाधिक दिक्कत होती है। मंगलवार को ओपीडी में 48 बच्चे डायरिया से ग्रसित पहुंचे।
चिकित्सक ने बताया ओपीडी में 140 से 150 बच्चे उपचार को प्रतिदिन आते हैं। इसमें 45 से 50 बच्चे डायरिया से पीड़ित होते हैं। 3 से 4 बच्चे ऐसे होते हैं, जिनकी हालत गंभीर होती है, जिन्हें तुरंत ही भर्ती करके उचित इलाज किया जाता है। बाकी आने वाले बच्चे जिनमें डायरिया का शुरुआती लक्षण होते हैं, उनको भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती है। बताया बारिश के बाद से डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या में एक साथ इजाफा हुआ है।
डायरिया की विशेषता है कि इसमें बच्चे को पतले दस्त होते हैं और पेट दर्द भी हो सकता है। डायरिया में बच्चे का मुंह और त्वचा सूखी दिखाई देती है। बच्चे को चक्कर और कमजोरी की समस्या होने लगती है। दिन में कई बार दस्त और साथ में उल्टी भी होती है। कई बार बच्चा कम या बिल्कुल भी यूरियन नहीं करता और साथ ही यूरियन का रंग गहरा भी हो जाता है। उन्होंने बताया मंगलवार को दो बच्चे वार्ड में भर्ती किए गए। वहीं सोमवार को भी बच्चे भर्ती किए गए थे।
डायरिया के कारण
चिकित्सक ने बताया कि बच्चे को बाहर का खाना या दूषित खाना खिलाना, गंदा पानी, पानी कम मात्रा में पिलाना भी डायरिया होने का प्रमुख कारण है।
इन बातों का रखें ध्यान
- दस्त के दौरान बच्चों को तरल पदार्थ दें।
- दस्त होने पर बच्चों को उम्र के अनुसार 14 दिनों तक जिंक की गोली अवश्य दें।
- स्वच्छ पेयजल का उपयोग करें।
- उम्र के अनुसार शिशु व बाल पोषण संबंधी परामर्श दें।
- डायरिया को फैलने से रोकने के लिए शौचालय का उपयोग करें।
- खाना बनाने, परोसने एवं खाना खिलाने से पूर्व व बच्चों का मल साफ करने के बाद साबुन से हाथ धोएं।