एटा। कासगंज में गठित तीन अधिकारियों की समिति ने जांच रिपोर्ट पेश कर दी है। इसमें ट्रैक्टर चालक को ही हादसे के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही 24 लोगों की मौत का दाग गांव कसा के सतेंद्र के सिर पर लग गया है। इन 24 मरने वालों में 4 तो उसके ही परिवार के हैं। उसे समझ नहीं आ रहा कि यह दाग और संताप किस प्रायश्चित से मिट सकेगा?
सतेंद्र के करीब 10 माह के नाती सिद्दू का दो दिन पहले ही गांव में मुंडन संस्कार हुआ था। जिसके बाद परिवार वालों ने गंगा स्नान का विचार बनाया था। 24 फरवरी को माघ पूर्णिमा वाले दिन कादरगंज गंगा घाट चलने की बात तय हुई। इस खुशी के मौके और पुण्य के काम में गांव के अन्य लोग भी शामिल हो लिए। कसा सहित गांव रोरी, खिरिया और बनार के कुल 54 लोग ट्रैक्टर व ट्रॉली में सवार होकर चले थे, लेकिन यह ट्रैक्टर सतेंद्र का नहीं था। उसका ट्रैक्टर खराब पड़ा था। ऐसे में पड़ोसी गांव के परिचित राहुल से उसका ट्रैक्टर मंगवाया और इसमें अपनी ट्रॉली लगा ली थी।
जांच रिपोर्ट कासगंज में गठित अधिकारियों की समिति ने दी है, उसमें प्रमुख कारण चालक की लापरवाही को ठहराया गया है। साफ कहा गया है कि ट्रॉली की कपलिंग या बेयरिंग टूटने की वजह से हादसा नहीं हुआ है। ब्रेक दोनों पैडल से न लगना हादसे की वजह रही। एक ओर के पहिए के ब्रेक लगने से ट्रैक्टर दूसरी ओर घूम गया और तालाब में जा गिरा। ट्रैक्टर की तेज रफ्तार, साउंड सिस्टम का बजना आदि का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है। उधर, सतेंद्र का साफ कहना है कि बेयरिंग टूटने से हादसा हुआ, अब कोई कुछ भी बताता रहे। इसी ट्रॉली में सवार रहीं लक्ष्मी देवी बताती हैं कि ट्रैक्टर सामान्य रफ्तार में ही था। मोड़ते समय यह हादसा हुआ।