जलेसर। नगर के लोहा व्यापारी कपिल वार्ष्णेय ने अदालत में अर्जी दाखिल की है। इसमें बताया कि 10 जून को अपने बैंक खाते से गाजियाबाद की फर्म गौरव-नरेश प्राइवेट लिमिटेड को 1.85 लाख रुपये का आरटीजीएस किया था। लापरवाही से यह धनराशि केरल के त्रिशूर की एक फर्म को स्थानांतरित हो गई।
लोहा व्यापारी कपिल वार्ष्णेय नगर के मोहल्ला मंडी जवाहरगंज के निवासी हैं। 10 जून को स्थानांतरित की गई धनराशि जब दो दिन तक गाजियाबाद की फर्म के खाते में नहीं पहुंची तो कपिल ने बैंक में संपर्क किया। वहां जानकारी हुई कि गलती से रुपये केरल के त्रिशूर की एक फर्म को ट्रांसफर हो गए हैं। इस पर बैंक स्टाफ ने धनराशि की वापसी को कुछ दिन का समय मांगा। बैंक के उच्चाधिकारियों से संपर्क किए जाने पर उन्होंने भी धनराशि वापस कराने का आश्वासन दिया। लगातार चक्कर लगाने पर 30 जून को बैंक अधिकारियों से उनकी तीखी झड़प हो गई। इस पर बैंक अधिकारियों ने साफ मना कर दिया कि उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है।
बैंक के शाखा प्रबंधक शुभम ने कहा कि बाउचर में खाता संख्या गलत होने पर धनराशि केरल की एचडीएफसी को ट्रांसफर हो गई। केरल की एचडीएफसी बैंक को मेल के माध्यम से संबंधित खाते से लेनदेन पर रोक लगाते हुए धनराशि वापस कराने को कहा गया है। वहां से जवाब मिला है कि ग्राहक ने यूपीआई के माध्यम से धनराशि निकाल ली है। ग्राहक से संपर्क कर धनराशि वापस कराने को प्रयास किया जा रहा है। व्यापारी का कहना है कि दूसरे खाते में धनराशि ट्रांसफर होने के लिए सिर्फ बैंक स्टाफ की गलती है। उन्होंने कोर्ट के माध्यम से बैंक अधिकारियों को नोटिस भेजकर 15 दिनों में धनराशि वापसी की मांग की है।