एटा। मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में इस माह 26 दिन में 102 गर्भवतियों के सिजेरियन प्रसव कराए गए हैं। एक माह में इतने ऑपरेशन का यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
मेडिकल कॉलेज के द्वितीय तल पर स्त्री एवं प्रसूति विभाग संचालित हैं। यहां पर सुविधाएं बेहतर होने की वजह से हर वर्ग की महिलाएं उपचार ले रही हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. साधना सिंह ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में पानी की कमी तो किसी के गर्भ में बच्चे की लोकेशन गलत होने की वजह से सिजेरियन प्रसव कराना पड़ा है। खास बात यह है कि इस माह सबसे अधिक सिजेरियन किए गए। दो दिन में तो 21 सिजेरियन किए गए। यह मेडिकल कॉलेज के लिए बड़ी उपलब्धि हैं। महिला वार्ड में भर्ती प्रसूताओं का कहना है कि स्वास्थ्य समस्याओं, जटिलताओं वजह से सिजेरियन प्रसव मजबूरन कराना पड़ा है। वहीं कुछ प्रसूताओं का कहना है कि सुरक्षा की दृष्टि से उन्होंने सिजेरियन प्रसव का विकल्प चुना।
इन वजहों से करना पड़ता है सिजेरियन प्रसव
- कुछ महिलाएं सामान्य प्रसव का दर्द सहन न करने की स्थिति में सिजेरियन प्रसव कराती हैं।
- पहला बच्चा सिजेरियन प्रसव होने के बाद दूसरा भी सिजेरियन प्रसव करना पड़ता है।
- बच्चेदानी की हड्डी सिकुड़ने पर सिजेरियन प्रसव होता है।
- गर्भ में बच्चे की लोकेशन गलत होने पर।
- बच्चे की धड़कन कम होने पर।
- बच्चे के घेरे में तरल न होने पर।