बाइक सवार पुलिस कर्मी से लूट की। जब पता चला कि वो पुलिस में है, तो इस बात का डर सताने लगा कि पकड़े जाएंगे। इसी वजह से सिपाही की हत्या कर दी गई। न्यायालय ने दोषी को 10 साल कारावास की सजा से दंडित करने का आदेश दिया है।
मैनपुरी निवासी सिपाही की हत्या और डकैती के मामले में विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र नरेंद्र पाल राणा ने दंडादेश सुनाया। दोषी संतोष निवासी हकीमगंज थाना पटियाली को 10 साल कारावास की सजा से दंडित करने का आदेश दिया है।
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मामले की रिपोर्ट थाना पटियाली में मीरा देवी निवासी गांव परशुरामपुर थाना बरनाहाल जिला मैनपुरी ने दर्ज कराई थी। पुलिस को बताया था कि 26 जून 2008 को उसके पति आरक्षी रामवीर सिंह ड्यूटी करने के बाद मोटरसाइकिल से लौट रहे थे। रात 8 बजे के बाद उनके मोबाइल पर बात होना बंद हो गई। इसके बाद वह घर नहीं पहुंचे। 28 जून को कासगंज थाने पर गई तो पता लगा कि पति की मोटरसाइकिल, वर्दी व अन्य सामान चौकी रोड पर अमरूद के बाग में पड़ा मिला। मंडी समिति के पीछे खेतों में एक पुरुष की लाश मिली है। इसकी पहचान मीरा ने अपने पति के रूप में की। पति की हत्या कर मोबाइल फोन, सोने की अंगूठी, जंजीर, 2500 रुपये आदि अपराधी ले गए हैं।
पुलिस ने 28 जुलाई 2008 की रात चौकी रोड पर मुठभेड़ में संतोष, अनिल कुमार जाटव निवासी हकीमगंज थाना पटियाली, वीरपाल निवासी भिड़वा नगला थाना ढोलना, रोहताश सिंह निवासी सलेगमां थाना छर्रा जिला अलीगढ़, लोचन निवासी एगमा थाना सहावर को गिरफ्तार किया। पूछताछ में इन लोगों ने पुलिस को बताया कि वह लूटपाट करते हैं।
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27 जुलाई को इसी सड़क पर एक मोटरसाइकिल सवार से लूट की। रामवीर सिंह के सिपाही होने की जानकारी पर पहचान के डर से लाठी-डंडों से पीटकर हत्या कर दी। संतोष को जमानत नहीं मिली और वह पकड़े जाने के बाद से जेल में ही बंद है। अदालत में सुनवाई के दौरान संतोष ने जुर्म कबूल लिया। अदालत ने उसका मामला अलग कर फैसला सुनाया। 10 साल के कठोर कारावास सहित 20 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित करने का आदेश दिया।