भले ही बेसिक शिक्षा परिषद ने स्कूलों में बच्चों के लिए खेल अनिवार्य कर दिया है, लेकिन ये बच्चे आखिर खेलेंगे कहां जब स्कूल में प्ले ग्राउंड ही नहीं है।
जो हैं भी तो उन पर किसी न किसी ने अवैध कब्जा कर रखा है। उच्च प्राथमिक विद्यालय, छावनी मड़ियांव और प्राथमिक विद्यालय, घोसियाना ये दो स्कूल ऐसा ही कुछ नजारा पेश करते हैं।
कर लिया जमीनों पर अवैध कब्जा
ये दोनों स्कूल राजधानी के उन दर्जनों परिषदीय विद्यालयों में से हैं जहां कि जमीनों को या तो गलत तरीके से बेच दिया गया या उन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है।
यहां खेलने के लिए मैदान तो दूर, छात्रों के आने-जाने के लिए रास्ते तक नहीं हैं।
राजधानी के नगर क्षेत्र में 256 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों हैं। इनमें से ज्यादातर स्कूलों की स्थापना 1960-70 के दशक में हुई थी।
चलती है दुकानें और होती हैं शादियां
शहर के विस्तारीकरण और पिछले कुछ वर्षों में जमीन की कीमतों में आए उछाल के कारण सरकारी स्कूलों की जमीन पर भी कब्जे शुरू हो गए।
कुछ स्कूल तो ऐसे भी हैं जहां के मैदान में दुकानें चलती हैं और शादियों तक आयोजन होता है।
अब आलम ये है कि शासन और प्रशासन की नाक के नीचे राजधानी के बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित सरकारी स्कूलों की जमीनों पर कब्जे हो गए हैं जबकि स्कूल एक-दो कमरों तक सिमट चुके हैं।
जिम्मेदारों की लापरवाही का आलम ये है कि सब कुछ देखने के बाद भी वे मौन हैं।