प्रदेश में जिला पंचायत राज अधिकारियों (डीपीआरओ) की तैनाती को लेकर चल रही मनमानी पर हाईकोर्ट ने कड़ा आदेश पारित किया है।
कोर्ट ने कहा कि जिलाधिकारी या संबंधित अधिकारी डीपीआरओ पद पर अपने चहेतों की नियुक्ति वरिष्ठता को नजरअंदाज कर नहीं कर सकते हैं।
कोर्ट ने कहा कि जहां पर भी डीपीआरओ के पद रिक्त हैं उनको तीन माह के भीतर नियमानुसार भरा जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में डीपीआरओ के पद पर कार्यवाहक, तदर्थ या कामचलाऊ तरीके से ‘पिक एंड चूज’ के आधार पर नियुक्ति नहीं की जाएगी।
कौशांबी के बालेशधर द्विवेदी की याचिका पर अधिवक्ता अंजली उपाध्याय की बहस सुनने के बाद न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने कहा कि नियुक्तियां करते समय वरिष्ठता का पूरा ध्यान रखा जाए और जहां कहीं भी रिक्तियां हैं उनको तीन माह में भरा जाए।
याचिका के माध्यम से डीपीआरओ के पद पर की जा रही मनमानी नियुक्तियों का मामला उठाया गया। कोर्ट ने इस आदेश को पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्देश दिया है।