ससुराल पक्ष के लिखाए गए दहेज उत्पीड़न के झूठे मुकदमे में बचई को 16 साल कचहरी के चक्कर काटने पड़े। अंत में उस पर लगा आरोप गलत साबित हुआ। अदालत ने बचई के साथ ही उसके माता पिता को भी दोषमुक्त कर दिया।
इलाहाबाद जिले के गोहरी गांव निवासी बचई, उसके पिता मंगरू, भाई रामसिंह और मां बसंती के खिलाफ 17 जून 1996 को दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया गया था। बचई के ससुर मौजी लाल ने आरोप लगाया था कि ससुराल वालों ने उसकी बेटी आरती देवी को मारपीट कर घर से निकाल दिया। उसने अस्पताल में आरती देवी के चोटों का मुआयना भी कराया।
आरोपों की जांच के दौरान अदालत ने पाया कि आरती के बयानों में विरोधाभास है। घटना के कई दिन बाद मुकदमा दर्ज कराया गया। मेडिकल रिपोर्ट और बयान में भी भिन्नता पाई गई। इससे आरती अपने लगाए आरोपों को साबित नहीं कर सकी।
मुकदमे पर एसीजेएम एमए खान ने सुनवाई की। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता कुश कुमार पांडेय ने पक्ष रखा।